नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए पांच नए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) की शैक्षणिक और बुनियादी ढांचागत क्षमता के विस्तार को मंजूरी दी। यह निर्णय उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका उद्देश्य देश में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देना है।
पांच IIT का होगा विस्तार
ये पांच नए आईआईटी आंध्र प्रदेश (आईआईटी तिरुपति), केरल (आईआईटी पलक्कड़), छत्तीसगढ़ (आईआईटी भिलाई), जम्मू-कश्मीर (आईआईटी जम्मू) और कर्नाटक (आईआईटी धारवाड़) राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में स्थापित किए गए हैं। शिक्षा मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, 2025-26 से 2028-29 तक चार वर्षों की अवधि में इस परियोजना की कुल लागत 11,828.79 करोड़ रुपये होगी।
अनुसंधान पार्क और संकाय पदों का सृजन
कैबिनेट ने इन आईआईटी में 130 संकाय पदों (प्रोफेसर स्तर यानी लेवल 14 और उससे ऊपर) के सृजन को भी मंजूरी दी है। इसके अतिरिक्त, उद्योग-अकादमिक संबंधों को मजबूत करने के लिए पांच नए अत्याधुनिक अनुसंधान पार्क भी बनाए जा रहे हैं।
अखिल भारतीय आधार पर प्रवेश
आईआईटी में प्रवेश अखिल भारतीय आधार पर होता है, इसलिए इस विस्तार से देशभर के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को लाभ होगा। 2025-26 की बजट घोषणा में कहा गया है कि पिछले 10 वर्षों में 23 आईआईटी में छात्रों की कुल संख्या 65,000 से बढ़कर 1.35 लाख हो गई है।
छात्र संख्या में वृद्धि
वर्ष 2014 के बाद शुरू किए गए इन पांच आईआईटी में 6,500 और छात्रों को शिक्षा की सुविधा प्रदान करने के लिए अतिरिक्त बुनियादी ढांचा बनाया जाएगा। इन आईआईटी में अगले चार वर्षों में छात्र संख्या में 6,500 से अधिक की वृद्धि की जाएगी, जिसमें स्नातक (यूजी), स्नातकोत्तर (पीजी) और पीएचडी कार्यक्रम शामिल हैं।
रोजगार के अवसर
छात्रों और सुविधाओं की बढ़ती संख्या का प्रबंधन करने के लिए संकाय, प्रशासनिक कर्मचारियों, शोधकर्ताओं और सहायक कर्मियों की भर्ती के माध्यम से प्रत्यक्ष रोजगार उत्पन्न होगा।
आईआईटी की स्थापना
ये पांच नए आईआईटी आंध्र प्रदेश (आईआईटी तिरुपति), केरल (आईआईटी पलक्कड़), छत्तीसगढ़ (आईआईटी भिलाई), जम्मू-कश्मीर (आईआईटी जम्मू) और कर्नाटक (आईआईटी धारवाड़) राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में स्थापित किए गए थे। पलक्कड़ और तिरुपति में आईआईटी का शैक्षणिक सत्र 2015-16 में और शेष तीन का 2016-17 में उनके अस्थायी परिसरों से शुरू हुआ था। अब ये आईआईटी अपने स्थायी परिसरों से काम कर रहे हैं।

