नई दिल्ली : भारत सरकार द्वारा हाल ही में पारित वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में लगभग 70 याचिकाएं दायर की गई हैं। इन याचिकाओं में प्रमुख विपक्षी दलों के नेताओं, धार्मिक संगठनों और नागरिक अधिकार संगठनों ने इस कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है।
वक्फ संशोधन अधिनियम 2025: क्या है विवाद
इस अधिनियम के तहत, केंद्रीय वक्फ परिषद में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने और विवादित वक्फ संपत्तियों की स्वामित्व पहचान के लिए सरकार को अधिकार देने का प्रस्ताव है। सरकार का कहना है कि यह कदम पारदर्शिता बढ़ाने और संपत्ति प्रबंधन में सुधार के लिए है। हालांकि, आलोचकों का मानना है कि यह मुस्लिम समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करता है और उनकी संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ाता है।
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाएं
अब तक, असदुद्दीन ओवैसी (AIMIM), इमरान प्रतापगढ़ी (कांग्रेस), महुआ मोइत्रा (TMC), अरशद मदनी (जमीयत उलेमा-ए-हिंद), मोहम्मद सलीम (CPI-M), शिया धर्मगुरु सैयद कल्बे जव्वाद नकवी सहित अन्य नेताओं और संगठनों ने इस कानून के खिलाफ याचिकाएं दायर की हैं। तमिलनाडु की DMK और भारतीय यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने भी इस कानून को संविधान के खिलाफ बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।
सरकार का पक्ष
केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने इस कानून का बचाव करते हुए कहा है कि यह धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप नहीं करता है। उन्होंने दावा किया कि यह कानून मुस्लिम समुदाय के वंचित वर्गों, जैसे महिलाओं, बच्चों और पिछड़े वर्गों को उनके अधिकार प्रदान करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस कानून को ‘वास्तविक सामाजिक न्याय’ बताते हुए कहा कि यह गरीब मुस्लिम परिवारों, विशेष रूप से मुस्लिम विधवाओं और बच्चों के अधिकारों की रक्षा करेगा।
सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने इन याचिकाओं की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष अनुरोधों को अस्वीकार करते हुए कहा कि अदालत के पास पहले से ही मामलों की सूचीबद्ध करने की एक मजबूत प्रणाली है और इन याचिकाओं को नियमानुसार सूचीबद्ध किया जाएगा।
वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 ने धार्मिक स्वतंत्रता और संपत्ति अधिकारों के मुद्दों को लेकर देश भर में बहस छेड़ दी है। सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई इस कानून की संवैधानिकता और इसके मुस्लिम समुदाय पर प्रभाव का निर्धारण करेगी। इस बीच, सरकार और विपक्षी दलों के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी जारी है।

