RANCHI: शहर के जलस्रोतों को बचाने की जिम्मेदारी जिनके कंधों पर है, वहीं आज सवालों के घेरे में हैं। नगर निगम की उदासीनता के कारण राजधानी के जलस्रोत लगातार प्रदूषण और अतिक्रमण की मार झेल रहे हैं। एक ओर खटाल संचालकों द्वारा जलस्रोतों के किनारे अवैध कब्जा किया जा रहा है तो दूसरी ओर नाले का गंदा पानी बिना किसी ट्रीटमेंट के सीधे नदियों में गिराया जा रहा है। इससे शहर के जलस्रोतों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया है। अब जलस्रोतों को अतिक्रमण से मुक्त कराने का आदेश हाई कोर्ट ने दिया है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि नगर निगम जलस्रोतों को कैसे बचाएगा।
नदी किनारे बसा दिया खटाल
शहर के तालाबों और नदी किनारे बने क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण देखा जा रहा है। हरमू नदी के किनारे दुकान और शेड बना लिए गए हैं। वहीं खटाल भी बसा दिए गए है। अब खटालों से निकलने वाला गोबर और गंदा पानी सीधे जलस्रोतों में जा रहा है, जिससे पानी दूषित हो रहा है। वहीं आसपास दुर्गंध व बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। वहीं आसपास में कई प्लांट भी संचालित हो रहे है। जिसका वेस्ट भी सीधे नदी में जा रहा है।

एसटीपी से नहीं चल रहा काम
नदी में फिलहाल नाले का पानी सीधे गिर रहा है। स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब नदी किनारे बने सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) भी अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रहे हैं। लाखों रुपये की लागत से बनाए गए इन प्लांटों का उद्देश्य था कि नालों के पानी को शुद्ध कर नदी में छोड़ा जाएगा। लेकिन कई जगह ये प्लांट या तो पूरी क्षमता से संचालित नहीं हो रहे हैं। ऐसे में नालों का गंदा पानी सीधे नदी में मिल रहा है और जल प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है।
प्रदूषण का पड़ रहा असर
एक्सपर्ट्स का कहना है कि जलस्रोतों पर अतिक्रमण और प्रदूषण का सीधा असर भूजल स्तर पर पड़ रहा है। तालाब और नदियां सिकुड़ रही हैं। जिससे बारिश का पानी सीधे जमीन में नहीं पहुंच पा रहा है। ऐसे में आने वाले सालों में इसका असर पेयजल संकट के रूप में सामने आ सकता है। उन्होंने नगर निगम से जलस्रोतों की नियमित सफाई, अतिक्रमण हटाने और एसटीपी को पूरी तरह क्रियाशील बनाने की मांग की है।
इस मामले में नगर प्रशासक सुशांत गौरव ने कहा कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की योजना बनाई जा रही है। चरणबद्ध तरीके से तालाबों और नदी किनारे से अवैध निर्माण हटाए जाएंगे।

