नई दिल्ली: हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व है। प्रत्येक वर्ष आश्विन मास में शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्रि का आरंभ होता है और पूरे नौ दिनों तक मां आदिशक्ति जगदम्बा का पूजन किया जाता है। इस वर्ष शारदीय नवरात्रि 15 अक्टूबर 2023 से शुरू होकर 23 अक्टूबर 2023 तक चलेगा। इस पर्व का हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण स्थान है, और पूरे देश भर में इसे धूमधाम से मनाया जाता है। हिंदू धर्म के शास्त्रों के अनुसार, नवरात्रि में मातारानी के आगमन से लेकर माता के गमन तक की सवारी को प्रतिदिन के हिसाब से बताया जाता है, जिसको लेकर कई मान्यताएं भी होती हैं। इस साल नवरात्रि का पहला दिन रविवार है और मां दुर्गा इस दिन हाथी पर सवार होकर आएंगी। जानिए हाथी पर आगमन किस बात की संकेत देता है।

हाथी पर आगमन और भैंसे पर गमन:
ज्योतिषाचार्य दशरथ नंदन द्विवेदी ने बताया कि नवरात्रि के पहले दिन के आधार पर मां दुर्गा की सवारी तय हो जाता है। इस बार, माता रानी हाथी पर सवार होकर आ रहीं हैं और उनका गमन भैंसे पर होगा। नवरात्रि में माता के आगमन के साथ, लोग आदर्श भक्ति और धार्मिक अनुष्ठान का पालन करते हैं सकारात्मक परिवर्तन की कामना करते हैं। हाथी पर माता का आगमन इस बात की ओर संकेत कर रहा है कि इस साल खूब अच्छी वर्षा होगी और खेती अच्छी होगी। देश में अन्न धन का भंडार बढ़ेगा।
भैंसे पर गमन है अशुभ:
पंडित दशरथ नंदन द्विवेदी ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार नवरात्रि के महत्वपूर्ण पर्व में मां दुर्गा के आगमन के विशेष मान्यता होती है। इसके अनुसार, जब मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं, तो यह समय शुभ होता है और भक्तों के लिए आशीर्वाद का संकेत माना जाता है। इसके विपरीत, माता के गमन की बात करें तो इस वर्ष सोमवार के दिन मां दुर्गा का गमन भैंसे पर होगा, जो किसी भी परिस्थितियों में अशुभ माना जाता है। इस संकेत से यह सुझाव दिया जा रहा है कि देश में शोक और रोग की वृद्धि हो सकती है।
क्यों शुभ है हाथी पर माता का आगमन:
माना गया है कि मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं तो यह एक बेहद शुभ संकेत होता है। हाथी को ज्ञान, समृद्धि, और शुभता का प्रतीक माना जाता है, और इसका मतलब है कि आने वाले साल में अधिक ज्ञान और समृद्धि होगी। माता रानी के वाहन के रूप में हाथी का चयन भविष्य में आर्थिक समृद्धि और ज्ञान की वृद्धि के साथ जुड़े समय की सूचना देता है। इसके साथ ही, यह बताता है कि लोगों के बिगड़े काम और प्रॉब्लम्स में सुधार हो सकता है, और माता रानी की पूजा अर्चना करने वाले भक्तों पर विशेष कृपा बरस सकती है।
क्या है मान्यता?
देवी भागवत पुराण में बताया गया है कि महालया के दिन जब पितृगण धरती से लौटते हैं तब मां दुर्गा अपने परिवार और गणों के साथ पृथ्वी पर आती हैं। हर साल नवरात्रि के अवसर पर मां दुर्गा विभिन्न वाहनों से आती हैं, यानी वाहन का चयन हर बार अलग होता है। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन वाहनों का चयन भविष्य की घटनाओं और परिप्रेक्ष्य को सूचित करने के रूप में महत्वपूर्ण हो सकता है। यह संकेत देता है कि आगामी साल में किस प्रकार की घटनाएं हो सकती हैं और आने वाला वर्ष कैसा हो सकता है।
सिंह ही नहीं और भी हैं मां के सवारी:
माता दुर्गा के वाहनों का अर्थ धार्मिक और ज्योतिषीय परंपराओं में महत्वपूर्ण होता है। यूं तो मां दुर्गा का वाहन सिंह को माना जाता है लेकिन हर साल नवरात्रि के समय तिथि के अनुसार माता अलग-अलग वाहनों पर सवार होकर धरती पर आती हैं। देवीभागवत पुराण में सप्ताह के सातों दिनों के अनुसार देवी के आगमन का अलग-अलग वाहन पर बताया गया है।
सोमवार – रविवार को नवरात्रि आरंभ होने पर हाथी होगा सवारी
अगर नवरात्रि का आरंभ सोमवार या रविवार को होता है, तो माता दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं। यह संकेत देता है कि आने वाले साल में वर्षा का समय अच्छा हो सकता है और खेती में सफलता हो सकती है।
शनिवार – मंगलवार को घोड़ा
शनिवार और मंगलवार को नवरात्रि का आरंभ होने पर माता दुर्गा घोड़े पर सवार होकर आती हैं। इसका संकेत यह माना गया है कि साल में सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से स्थिरता और सफलता हो सकती है।
डोली पर कब होंगी सवार?
गुरुवार या शुक्रवार को नवरात्रि का आरंभ होता है तो माता दुर्गा डोली पर सवार होकर आती हैं। इसका संकेत यह है कि साल में संयम और परिवार के साथ एकत्रता की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
बुधवार के दिन नाव पर सवार:
बुधवार के दिन नवरात्रि पूजा का आरंभ होने पर माता दुर्गा नाव पर सवार हो कर आती हैं। यह इस बात की संकेत देता है कि साल में यात्राओं और अच्छे संबंधों का समय होगा।

