हजारीबाग : सुबह के करीब 5 बजे… पेलावल में फैली नींद भरी खामोशी को एनआईए (NIA) के बूटों की आवाज ने चीर दिया। कुछ ही मिनटों में डॉ. जमील का घर पूरी तरह से सुरक्षा घेरे में आ चुका था। आतंकियों की फंडिंग, भर्ती और दिल्ली ब्लॉस्ट कनेक्शन के संदेह ने इस छापेमारी को बड़े ऑपरेशन का हिस्सा बना दिया है। सूत्रों के अनुसार, पूछताछ शुरू हो चुकी है और हर जब्त डिवाइस एक नए राज की तरफ इशारा कर रहा है।
भारी सुरक्षा बलों के साथ घर की घेराबंदी
सूत्रों के मुताबिक, इस ऑपरेशन में NIA के साथ करीब 200 पुलिसकर्मी शामिल थे। टीम ने पूरे पेलावल इलाके को चारों ओर से सील कर दिया और क्षेत्र कुछ समय के लिए पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। छापेमारी के दौरान डॉ. जमील को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया और उसके घर की तलाशी शुरू की।
अधिकारियों ने घर से मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्ड डिस्क और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं। माना जा रहा है कि इन डिजिटल उपकरणों से टेरर फंडिंग, विदेशी संपर्क, संभावित भर्ती मॉड्यूल और नेटवर्क के वित्तीय लेन-देन की कई परतें खुल सकती हैं।
पहले भी सामने आया था ISIS कनेक्शन
हजारीबाग का पेलावल क्षेत्र पहले भी आतंकी गतिविधियों के कारण सुर्खियों में रहा है। यहां से ISIS से जुड़े कई संदिग्धों की गिरफ्तारी हो चुकी है। NIA को आशंका है कि डॉ. जमील का नाम एक ऐसे नेटवर्क के संपर्क में आया है, जो विभिन्न राज्यों में सक्रिय आतंकी संगठनों को लॉजिस्टिकल सपोर्ट, सुरक्षित ठिकाने और वित्तीय मदद मुहैया कराने में शामिल हो सकता है। जांच एजेंसी यह भी देख रही है कि क्या इस नेटवर्क का संबंध दिल्ली में हाल के विस्फोट या अन्य बड़ी साजिशों से है। फिलहाल अधिकारियों ने केस से जुड़े किसी भी विशेष नाम या FIR नंबर का खुलासा नहीं किया है।
टेरर फंडिंग मॉड्यूल खंगाल रही एजेंसी
अधिकारियों के अनुसार, छापेमारी का मुख्य उद्देश्य उन वित्तीय स्रोतों को खोजना है जिनके माध्यम से संदिग्ध आतंकी मॉड्यूल को फंडिंग की जा रही थी। टीम जब्त किए गए दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक डेटा की मदद से यह जांचने में जुटी है कि क्या धन का प्रवाह देश के बाहर से हो रहा था या यह आंतरिक नेटवर्क के माध्यम से संचालित किया जा रहा था।

