RANCHI: ह्यूमन ट्रैफिकिंग हमेशा से चिंता का विषय रहा है। पुलिस की नाक के नीचे से ट्रैफिकर बच्चों और महिलाओं को तस्करी के लिए ले जाते थे। इसकी भनक तक नहीं लग पाती थी। लेकिन तकनीक और आरपीएफ की तत्परता से अब तस्कर अपनी योजनाओं को अंजाम तक पहुंचाने में सफल नहीं हो पा रहे है। यहीं वजह है कि एक साल में आरपीएफ ने रांची डिवीजन में 339 लोगों को रेस्क्यू किया गया है। इतना ही नहीं 15 तस्करों को गिरफ्तार करने में भी सफलता हासिल की है। इसका खुलासा रांची रेल डिवीजन की एनुअल रिपोर्ट में हुआ है।
चलाए जा रहे है अभियान
आरपीएफ कमांडेंट पवन कुमार ने बताया कि ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते और डिग्निटी अभियान के अंतर्गत कुल 339 लोगों को असुरक्षित परिस्थितियों से रेस्क्यू किया गया। इनमें 172 बालक, 149 बालिकाएं, 12 पुरुष और 6 महिलाएं शामिल हैं। यह कार्रवाई बच्चों, महिलाओं और कमजोर वर्गों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। रेस्क्यू किए गए बच्चों और महिलाओं को बाल संरक्षण गृह, महिला संरक्षण केंद्र और संबंधित पुनर्वास संस्थानों में भेजा गया है। जहां उन्हें चिकित्सा सहायता, काउंसलिंग, शिक्षा और पुनर्वास से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते का मुख्य उद्देश्य ऐसे बच्चों को बचाना है जो बाल श्रम, भिक्षावृत्ति, गुमशुदगी या शोषण के खतरे में होते हैं, जबकि डिग्निटी अभियान महिलाओं और कमजोर व्यक्तियों को सम्मानजनक जीवन दिलाने पर केंद्रित है।
ह्यूमन ट्रैफिकिंग के खिलाफ कार्रवाई
इसके साथ ही मानव तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग के तहत भी उल्लेखनीय कार्रवाई की गई है। इस अभियान के दौरान कुल 12 मामलों का खुलासा किया गया, जिनमें 62 बच्चों और महिलाओं को तस्करी के चंगुल से मुक्त कराया गया। कार्रवाई के दौरान 15 तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। जिनसे पूछताछ के बाद तस्करी के नेटवर्क और उसके तरीकों का खुलासा भी हुआ है। कई और खुलासा किए जाने की उम्मीद है।
झांसा देकर ले जाते थे दूसरे शहर
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मानव तस्करी के ये मामले राज्य के विभिन्न जिलों से जुड़े हुए थे। मानव तस्कर बच्चों और महिलाओं को रोजगार, बेहतर जीवन या पढ़ाई का झांसा देकर दूसरे शहरों में ले जाते थे। समय पर मिली सूचना और सतर्कता के कारण इन नेटवर्क्स को तोड़ा जा सका। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

