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Palamu News: झारखंड में पहली बार जंगली हाथी की ट्रेंकुलाइज कर बचाई गई जान, पलामू के वन विभाग को मिली बड़ी सफलता

by Vivek Sharma
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Palamu : झारखंड के पलामू टाइगर रिजर्व और वन विभाग ने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की है। पहली बार रिजर्व की इन-हाउस टीम ने किसी जंगली हाथी को सुरक्षित तरीके से ट्रेंकुलाइज कर उसका इलाज किया है। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले हाथी या बाघ जैसे बड़े वन्य जीवों के इलाज के लिए कर्नाटक, असम या वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया जैसे बाहरी विशेषज्ञों पर निर्भर रहना पड़ता था।

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि 18 फरवरी को बेतला नेशनल पार्क क्षेत्र में एक जंगली हाथी को लंगड़ाते हुए देखा गया था। उसके पैर में गहरा घाव था। इससे शिकार की आशंका भी जताई जा रही थी। इसके बाद पीटीआर की टीम ने हाथी की लगातार ट्रैकिंग शुरू की।

लगातार निगरानी के बाद 26 फरवरी को पलामू टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक प्रजेशकांत जेना के नेतृत्व में हाथी को सफलतापूर्वक ट्रेंकुलाइज किया गया। इलाज से पहले मेटल डिटेक्टर से जांच की गई, ताकि यह तय किया जा सके कि हाथी को गोली नहीं मारी गई है। जांच में गोली का कोई प्रमाण नहीं मिला। बाद में साफ हुआ कि हाथी के पैर में लकड़ी घुसने से यह गंभीर घाव हुआ था।

खड़े-खड़े किया गया इलाज, गिरने का था बड़ा खतरा

वन अधिकारियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि ट्रेंकुलाइज के बाद हाथी बेहोशी की हालत में भी खड़ा रहे। अगर हाथी गिर जाता, तो उसकी जान को खतरा हो सकता था। इसी वजह से बेतला नेशनल पार्क में मौजूद पालतू हाथियों की मदद ली गई और जख्मी हाथी को खुले सुरक्षित स्थान पर लाकर उसका क्लिनिकल ट्रीटमेंट किया गया।

झुंड से अलग विचरण कर रहा था घायल हाथी

करीब 40 वर्ष का यह हाथी अपने झुंड से अलग अकेला विचरण कर रहा था। समय पर इलाज नहीं होता, तो उसकी जान जा सकती थी। फिलहाल हाथी की हालत स्थिर है, उसे दवाएं दी जा रही हैं और भोजन की समुचित व्यवस्था की गई है।

उपनिदेशक प्रजेशकांत जेना ने बताया कि पीटीआर और बेतला नेशनल पार्क के कर्मियों को पहले से ट्रेंकुलाइजेशन और वन्यजीव उपचार का प्रशिक्षण मिला हुआ है, जिसका लाभ इस चुनौतीपूर्ण अभियान में मिला। यह झारखंड में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक मील का पत्थर माना जा रहा है।

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