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‘यात्रीगण कृप्या ध्यान दें..’ क्या आप जानते हैं यह मधुर सी आवाज किसी लड़की की नहीं बल्कि….

महिला जैसे आवाज निकालने पर तंग भी मेरे दोस्त करते थे, लेकिन मुझे महिलाओं जैसे बोलने में अच्छा लगता था, तो मैंने नकल करना नहीं छोड़ा। आज उस नकल का फायदा मुझे मिला।

by Reeta Rai Sagar
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सेंट्रल डेस्कः आपने रेलवे स्टेशनों में एक महिला की ये अवाज जरूर सुनी होगी…’ यात्रीगण कृप्या ध्यान दे.. ट्रेन संख्या इतनी इस प्लेटफॉर्म पर आ रही है’ । लेकिन आपको पता है, यह पॉपुलर आज किसकी है। दरअसल यह आवाज किसी महिला की नहीं बल्कि एक पुरुष की है। यह आवाज रेलवे कर्मचारी श्रवण अदोदे की है। श्रवण अदोदे की अवाज को मिक्सिंग करके, अलग- अलग रेलवे स्टेशनों में चलाया जाता है

24 वर्षीय श्रवण अदोदे को ऐसे मिला था मौका
जब भी हम स्टेशन पहुंचते है, तो हम सब हर बार एक चिर परिचित आवाज जरूर सुनते है। जो कि एक महिला की होती है। पर आफको जानकर बेहद आशचर्य होगा कि वो मेल वॉयस है। यह आवाज हमें विभिन्न ट्रेनों की जानकारी देती है। यह अवाज 24 वर्षीय श्रवण अदोदे की है, जो रेलवे में ही कार्यरत है। इनकी आवाज का इस्तेमाल लगभग सभी स्टेशनों पर की जाती है।

बकौल श्रवण अदोदे, उन्हें बचपन से ही ट्रेन की छुक-छुक अच्छी लगती थी और इसी कारण वे रेलवे में काम करने की इच्छा रखते थे। उन्हें ट्रेनों में होने वाली घोषणाएं काफी प्रभावित करती थी। श्रवण ने बताया कि रेलवे पर रिकॉर्ड की गयी घोषणाएं प्रसारित की जाती थी। उसमें ही ट्रेनों की टाइमिंग और जानकारी बदल दी जाती थी। लेकिन एक दिन कुछ तकनीकी खराबी के कारण घोषणाएं नहीं हो पा रही थी। तभी सीनियर अधिकारियों ने मुझे उद्घोषक के तौर घोषणा करने को कहा। जिसके बाद मैंने ट्रेनों की जानकारी दी।

सरला चौधरी जैसी निकाल रहे अवाज
श्रवण की आवाज सुन अधिकारी बेहद प्रभावित हुए और यहीं से इसकी शुरूआत हुई। श्रवण ने बताया कि मैं उद्घोषणा रेलवे की पारंपरिक आवाज में करना चाहता था, लेकिन आवाज महिला की थी। इसलिए मैंने उद्घोषणा महिला की आवाज में ही की। रेलवे स्टेशनों पर जो आवाज सुनाई देती है, वह महिला उद्घोषक सरला चौधरी की है। उनके जैसा आवाज निकालना थोड़ा कठिन था, लेकिन मैंने कर लिया और मेरे आवाज को काफी प्यार मिला। अभी कई स्टेशनों पर मेरी ही आवाज का उपयोग किया जा रहा है।

सेंट्रल रेलवे मुख्यालय में वरिष्ठ उद्घोषकों ने किया सम्मानित
श्रवण बताते है कि यह मौका मिलने के बाद से उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। उन्हें मुंबई स्टेशन पर भी वहां के उद्घोषकों के द्वारा सम्मानित किया गया। सेंट्रल रेलवे मुख्यालय में उद्घोषकों ने मेरे काम की तारीफ की। मेरे लिए मुझे वहां से मिला सम्मान बहुत बड़ी उपलब्धि है। रेलवे ने मेरे काम को सम्मान दिया है।

दोस्त उड़ाते थे मजाक
इस काम में जहां एक ओर तारीफ मिली, तो वहीं दूसरी ओर के दोस्त उनका मजाक भी उड़ाते थे। आवाज को महिला उद्घोषक की आवाज के रूप में सेंट्रल रेलवे कई स्टेशनों पर लाउड स्पीकर से बजाया जाता है। जिसे लाखों यात्री सुनते है, लेकिन उन्हें यह बिल्कुल नहीं लगता है, कि यह एक पुरुष की आवाज है। श्रवण ने कहा कि उनके आवाज के कारण उसे स्कूल में सभी चिढ़ाते थे। मजाक उड़ाते थे। लेकिन आज उसी आवाज को लाखों लोग सुनते है। मैं पहले भी उनके मजाक को सीरियसली नहीं लेता था। मेरी आवाज सुनकर लाखों यात्री अपने गंतव्य तक पहुंच रहे है।

महिलाओं की आवाज निकालना लगता था अच्छा
अपनी इस यात्रा पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि बचपन में उन्हें महिलाओं की आवाज निकालना अच्छा लगता था। उसे महिलाओं को नकल करना अच्छा लगता था। लेकिन महिला जैसे आवाज निकालने पर तंग भी मेरे दोस्त करते थे, लेकिन मुझे महिलाओं जैसे बोलने में अच्छा लगता था, तो मैंने नकल करना नहीं छोड़ा। आज उस नकल का फायदा मुझे मिला।

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