रांची : राजधानी के दूसरे सबसे बड़े सरकारी हॉस्पिटल ‘सदर’ में मरीजों का भरोसा बढ़ता जा रहा है। वहीं उन्हें बेहतर सुविधाएं मिलने से अब वे प्राइवेट हॉस्पिटलों में इलाज कराने के लिए नहीं जा रहे हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हर महीने 200 महिलाओं की सिजेरियन डिलीवरी कराई जा रही है। जनवरी से लेकर दिसंबर 2024 तक 2392 महिलाओं की सदर हॉस्पिटल में सिजेरियन डिलीवरी कराई गई है। वह भी आयुष्मान योजना के तहत। इससे न केवल हॉस्पिटल की कमाई हो रही है, बल्कि मरीजों को भी वर्ल्ड क्लास की सुविधा मिल रही है। इतना ही नहीं, इसके लिए एक रुपया भी मरीजों या उनके परिजनों को खर्च नहीं करने पड़ रहे हैं।
इंश्योरेंस कंपनियों से मिल रहा क्लेम
वैसे तो सदर हॉस्पिटल में मरीजों का इलाज मुफ्त में किया जाता है। लेकिन, आयुष्मान योजना के आने के बाद से मरीजों को इसके तहत बेहतर सुविधाएं हॉस्पिटल में मिल रही है। वहीं मरीजों का इलाज आयुष्मान योजना से कर हॉस्पिटल प्रबंधन इंश्योरेंस कंपनियों से क्लेम ले रहा है। इलाज की बात करें तो आयुष्मान से सदर में जनवरी से नवंबर 2024 तक 26,519 मरीजों का आयुष्मान से इलाज किया गया है। इससे हॉस्पिटल ने करोड़ों रुपये की कमाई की है।
प्राइवेट अस्पतालों में सिजेरियन डिलीवरी के लिए 1 लाख चार्ज
प्राइवेट हॉस्पिटल में सिजेरियन डिलीवरी कराने का चार्ज तय है। जहां छोटे प्राइवेट हॉस्पिटल व क्लिनिक में सिजेरियन डिलीवरी कराने के 40-50 हजार रुपये लिए जाते हैं, वहीं कार्पोरेट हॉस्पिटलों में एक सिजेरियन डिलीवरी के लिए एक लाख रुपये तक चार्ज है। इसके अलावा हॉस्पिटल में रहना, खाना व दवाओं के लिए भी चार्ज वसूले जाते हैं, जिससे सिजेरियन डिलीवरी का खर्च 1.5 से 2 लाख रुपये तक पहुंच जाता है। लेकिन, सदर में ये सुविधा आयुष्मान के तहत फ्री में उपलब्ध कराई जा रही है।
जरूरी सामान खरीद रहा प्रबंधन
क्लेम से सदर हॉस्पिटल को अच्छी कमाई हो रही है। इन पैसों का इस्तेमाल हॉस्पिटल की जरूरतों को पूरा करने में खर्च किया जा रहा है। इक्विपमेंट्स के अलावा कई जरूरी सामान भी हॉस्पिटल में खरीदे जा रहे है। जिससे कि इलाज के लिए आने वाले मरीजों को परेशानी का सामना न करना पड़े। बता दें कि 520 बेड वाले इस हॉस्पिटल में सबसे ज्यादा गायनिक के केस आते हैं, जिसमें डिलीवरी के लिए आने वाली महिलाओं की संख्या अधिक है।
हर दिन कराई जा रही 25-30 डिलीवरी
हॉस्पिटल में हर दिन दो दर्जन से अधिक डिलीवरी कराई जा रही है। इसमें सबसे ज्यादा नार्मल डिलीवरी है। लेकिन, आधा दर्जन सिजेरियन डिलीवरी भी हॉस्पिटल में कराई जा रही है। इससे साफ है कि अब हर तरह की सुविधा मुहैया कराने के लिए हॉस्पिटल प्रबंधन ने कमर कस लिया है।
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