Home » आज से शुरू हो रहा है पितृ पक्ष, जानें कैसे मिलेगा पितरों का आशीर्वाद?

आज से शुरू हो रहा है पितृ पक्ष, जानें कैसे मिलेगा पितरों का आशीर्वाद?

by Rakesh Pandey
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

धर्म डेस्क: अपने पितरों के लिए श्रद्धा से किए गए मुक्ति कर्म को श्राद्ध कहते हैं। उन्हें तृप्त करने की क्रिया को तर्पण कहा जाता है. तर्पण करना ही पिंडदान करना है। भाद्रपद की पूर्णिमा से अश्विन कृष्ण की अमावस्या तक कुल 16 दिन तक श्राद्ध रहते हैं। जिन लोगों की मृत्यु किसी भी माह की पूर्णिमा तिथि के दिन होती है उनका श्राद्ध इसी दिन किया जाता है। स्पष्ट कर दें कि जिस दिन दाह संस्कार किया जाता है उसी तिथि पर श्राद्ध कर्म करने का विधान है। माना जाता है कि पितृ पक्ष में अगर नियमों का पालन करते हुए श्राद्ध कर्म किया जाए तो पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।

पितृपक्ष में श्राद्ध का महत्व

श्राद्ध के जरिए पितरों की तृप्ति के ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है और पिंड दान व तर्पण कर उनकी आत्मा की शांति की कामना की जाती है। मान्यतानुसार श्राद्ध में जो भी कुछ देने का हम संकल्प लेते हैं, वह सब कुछ उन पूर्वजों को अवश्य प्राप्त होता है और पूर्वज परिवार को खुशहाली का आशीर्वाद देते हैं। जिस तिथि में जिस पूर्वज का स्वर्गवास हुआ हो उसी तिथि को उनका श्राद्ध किया जाता है जिनकी परलोक गमन की तिथि ज्ञान न हो, उन सबका श्राद्ध अमावस्या को किया जाता है।

श्राद्ध विधि

यदि पूरे विधि विधान से श्राद्ध कर्म न किया जाए तो मान्यता है कि वह श्राद्ध कर्म निष्फल होता है और पूर्वजों की आत्मा अतृप्त ही रहती है। शास्त्रसम्मत मान्यता यही है कि किसी सुयोग्य विद्वान ब्राह्मण के जरिए ही श्राद्ध कर्म (पिंड दान, तर्पण) करवाना चाहिए। श्राद्ध करने के लिए किसी ब्राह्मण को आमंत्रित करें, भोज कराएं और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा भी दें। श्राद्ध के दिन अपनी सामर्थ्य अनुसार मृत व्यक्ति की पसंद का खाना बनाएं।

READ ALSO : देश के नेशनल हाईवे होंगे गड्ढा मुक्त! नितिन गडकरी का ऐलान…

जानें पिंडदान का तरीका

पितृ पक्ष में पिंडदान का भी बेहद महत्व होता है इसमें लोग चावल, गाय का दूध, घी, गुड और शहद मिलाकर बने पिंडों को पितरों को अर्पित करते हैं। इसके साथ ही काला तिल, जौ, कुशा, सफेद फूल मिलाकर तर्पण किया जाता है. यह तर्पण पंडित जी द्वारा बताई गई विधि के अनुसार किया जाता है।

Related Articles