जमशेदपुर : उत्तर प्रदेश राज्य का वो जिला, जो बागियों की धरती के नाम से चर्चित है, 1857 की क्रांति के महानायक अमर शहीद मंगल पांडे की जन्मभूमि बागी बलिया, उत्तर प्रदेश, की धरती पर जागरुक शिक्षण प्रशिक्षण संस्थान द्वारा आयोजित अखिल भारतीय नाट्य एवं लोकनृत्य प्रतियोगिता का आयोजन 16 जनवरी से 18 जनवरी तक किया गया। इसमें देशभर से आए कलाकारों ने अपने कला का प्रदर्शन किया। इस आयोजन में जमशेदपुर की नाट्य संस्था, जो पूरे देश में बेहतरीन नाट्य मंचन के लिए ख्याति प्राप्त है, की नाट्य संस्था पथ – पीपुल्स एसोसिएशन फॉर थिएटर जमशेदपुर के निर्देशक मोहम्मद निजाम इस आयोजन में निर्णायक की भूमिका में शामिल हुए। प्रतियोगिता में अतिथि नाट्य दल के रूप में पहले दिन यानी 16 जनवरी को नाट्य संस्था- पथ जमशेदपुर ने नाटक ‘दधीचि @ यूथ. कॉम’ का सफल मंचन किया। नाटक के पश्चात मंत्री के हाथों नाट्य दल का सम्मान किया गया।
समकालीन सामाजिक-राजनीतिक यथार्थ पर आधारित यह नाटक आज के युवा वर्ग में बढ़ते भटकाव, पारिवारिक एवं सामाजिक उपेक्षा तथा उसके राजनीतिक दोहन जैसे ज्वलंत मुद्दों को प्रभावशाली नाट्य भाषा में प्रस्तुत करता है। नाटक यह महत्वपूर्ण प्रश्न उठाता है कि किस प्रकार उपेक्षित युवा पीढ़ी का आक्रोश धीरे-धीरे नकारात्मक सोच में परिवर्तित होता है और किस तरह विभिन्न राजनीतिक शक्तियां इस स्थिति का अपने हित में उपयोग करती हैं।

‘दधीचि@यूथ.कॉम’ को समाप्त और असमाप्त के बीच एक ऐसे बिंदु पर छोड़ा गया है, जहां से एक निर्णायक संघर्ष की संभावना उभरती है। यह संघर्ष केवल उद्वेलन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि युवा ऊर्जा के सकारात्मक रूपांतरण के माध्यम से एक उज्ज्वल भविष्य और सशक्त लोकतांत्रिक व्यवस्था की आशा भी जगाता है।
इन रंगकर्मियों ने दर्शकों का मोहित किया मन
- अरुणि : रूपेश कुमार
- अभिमन्यु : सत्यम सिंह
- एकलव्य : आशुतोष कुमार सिंह
- रंजन : रूपेश प्रसाद
- संतोष : सुमन सौरभ कुमार
- मंदिरा : छवि दास
- प्रो. शंकर सक्सेना : मोहम्मद निज़ाम
इन्होंने संभाली पार्श्व मंच की कमान
- मंचन आलोक : ख़ुर्शीद आलम
- मंच सज्जा : राजकुमार और रूपेश
- रूप सज्जा और वस्त्र विन्यास : छवि दास
- पार्श्व संगीत : रूपेश और राजकुमार
नाटक के लेखक डॉ. अरूप मोइत्रा हैं, जबकि इसका हिंदी अनुवाद ज्योति–निज़ाम द्वारा किया गया है। नाटक का सशक्त निर्देशन मो. निज़ाम ने किया, जिन्होंने कथ्य और मंचीय शिल्प के माध्यम से दर्शकों को गहराई से जोड़ने में सफलता प्राप्त की।
राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव में ‘दधीचि@यूथ.कॉम’ की प्रस्तुति ने दर्शकों को गंभीर आत्ममंथन के लिए प्रेरित किया और युवाओं की भूमिका, सामाजिक जिम्मेदारी तथा लोकतांत्रिक मूल्यों पर एक सार्थक संवाद स्थापित किया। नाटक को दर्शकों और रंगकर्मियों से विशेष सराहना प्राप्त हुई।
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