सेंट्रल डेस्क : दिल्ली में वायु गुणवत्ता की स्थिति एक बार फिर गंभीर होती जा रही है। राष्ट्रीय राजधानी में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) कई स्थानों पर ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच चुका है, जिससे न सिर्फ लोग परेशान हैं, बल्कि स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ सकता है। गुरुवार यानी 14 नवंबर 2024 को सुबह 6 बजे के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली का AQI 432 पर पहुंच गया, जो कि ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। 13 नवंबर को यह आंकड़ा 418 था, जो फिर भी बेहद चिंताजनक था। गुरुवार सुबह 6 बजे जहांगीरपुरी इलाके में AQI 606 तक पहुंच गया, जो काफी खतरनाक श्रेणी में माना जाता है।

जहांगीरपुरी और अन्य क्षेत्रों में स्थिति नाजुक
दिल्ली के अधिकांश इलाके धुंध और प्रदूषण की चादर में लिपटे हुए हैं। खासतौर पर दिल्ली एनसीआर के कुछ प्रमुख क्षेत्रों में AQI 400 के पार जा चुका है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और SAFAR के ताजा आंकड़ों के अनुसार, जहांगीरपुरी का AQI सुबह 6 बजे 606 तक पहुंच गया, जो कि बेहद खतरनाक स्थिति को दर्शाता है। इसके अलावा, आनंद विहार (AQI 473), पटपड़गंज (AQI 472), और अशोक विहार (AQI 471) जैसे स्थानों पर भी AQI ने गंभीर स्तर को छुआ है।
इसके अतिरिक्त, दिल्ली के अन्य इलाके जैसे पंजाबी बाग, मुंडका, द्वारका, लाजपत नगर और रोहिणी में भी AQI 450 से ऊपर दर्ज किया गया। बुधवार को दिल्ली के 36 AQI सेंटरों में से 35 पर AQI 400 से अधिक था और इनमें से 25 सेंटरों पर तो AQI 450 से भी ज्यादा था। इससे साफ है कि दिल्ली का वायु प्रदूषण एक गंभीर स्थिति में है, और लोगों को फिलहाल राहत की कोई उम्मीद नहीं है।
गाड़ी और धूल प्रदूषण के मुख्य कारण
दिल्ली में प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण वाहनों से होने वाला उत्सर्जन है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए केंद्र की निर्णय सहायता प्रणाली के अनुसार, वाहनों से निकलने वाली जहरीली गैसों का प्रदूषण में लगभग 13.3 प्रतिशत योगदान है। इसके अलावा, धूल, कचरा जलाने और अन्य उद्योगों से भी प्रदूषण के स्तर में वृद्धि हो रही है।
वहीं, मौसम विभाग ने गुरुवार (14 नवंबर) के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जिसका मतलब है कि प्रदूषण की स्थिति में फिलहाल कोई सुधार नहीं होने वाला है। हालांकि, शुक्रवार से हवा की रफ्तार में थोड़ी वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे प्रदूषण में कुछ राहत मिल सकती है।
वेस्टर्न डिस्टर्बेंस और कोहरे का असर
उत्तर भारत में इन दिनों सक्रिय वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के कारण हवा की दिशा में बदलाव हुआ है। इसके परिणामस्वरूप, पाकिस्तान और पंजाब से लेकर दिल्ली तक प्रदूषण का भारी ढेर एकत्रित हो गया है। जब प्रदूषण, धूल और धुआं एक साथ मिलते हैं और तापमान गिरता है, तो यह आद्रता के साथ मिलकर धुंध (कोहरा) का रूप ले लेता है, जो दिल्ली में इस समय स्पष्ट रूप से नजर आ रहा है। इससे न केवल दृश्यता पर असर पड़ता है, बल्कि सांस लेने में भी मुश्किल होती है।
क्या उम्मीद की जा सकती है
मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली में प्रदूषण से राहत मिलने में अभी समय लगेगा। इस सप्ताहांत या अगले सप्ताह की शुरुआत तक तापमान गिरकर 15 डिग्री सेल्सियस के आसपास आ सकता है और अधिकतम तापमान भी 30 डिग्री सेल्सियस से नीचे रह सकता है। इस दौरान हवा की रफ्तार थोड़ी बढ़ने की संभावना है, जिससे प्रदूषण के स्तर में कुछ कमी आ सकती है।
AQI का अर्थ और स्वास्थ्य पर असर
वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 0 से 50 के बीच ‘अच्छा’, 51 से 100 ‘संतोषजनक’, 101 से 200 ‘मध्यम’, 201 से 300 ‘खराब, 301 से 400 ‘बहुत खराब’, 401 से 450 ‘गंभीर’ और 450 से ऊपर ‘गंभीर प्लस’ माना जाता है। दिल्ली में जहांगीरपुरी और अन्य क्षेत्रों में AQI का स्तर 450 से ऊपर है, जिसका मतलब है कि यहां का वायु प्रदूषण बेहद खतरनाक है। गंभीर AQI स्तर पर लोगों को विशेष रूप से सांस संबंधित समस्याओं का सामना हो सकता है, जैसे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, और अन्य श्वसन संक्रमण।
दिल्ली में इस समय प्रदूषण की स्थिति बेहद गंभीर है और स्वास्थ्य पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। सरकार को प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है, साथ ही नागरिकों को भी बाहर निकलते समय एहतियात बरतने की सलाह दी जा रही है। अगले 24 घंटों में हवा की रफ्तार बढ़ने से मामूली राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन तब तक दिल्लीवासियों को गंभीर वायु गुणवत्ता का सामना करना पड़ सकता है।
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