पटना : बिहार में शराबबंदी के बाद उत्पन्न राजस्व घाटे को पूरा करने के लिए राज्य सरकार ने खनन, पुलिस और परिवहन विभाग को नियम उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त अभियान चलाने का निर्देश दिया है। इस अभियान के तहत चालकों से भारी भरकम चालान वसूले जा रहे हैं। लेकिन, पूर्णिया से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कार में नहीं था हेलमेट, फिर भी कटा चालान
पूर्णिया जिले में परिवहन विभाग ने एक कार मालिक पर हेलमेट नहीं पहनने के आरोप में 1000 का चालान काट दिया। चौसा लौआलगाम के निवासी मो. इरफान को उनके मोबाइल पर एक मैसेज प्राप्त हुआ, जिसमें बताया गया कि गाड़ी संख्या BR11 AG 6502 के चालक ने हेलमेट नहीं पहना था, जिसके चलते चालान किया गया है। इरफान के अनुसार, जब चालान कटा तब उनकी कार मधेपुरा में थी और वे पूर्णिया गए भी नहीं थे।
बाइक की तस्वीर, कार का नंबर
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि चालान में जिस वाहन की फोटो भेजी गई, वह एक मोटरसाइकिल थी, लेकिन उस पर अंकित नंबर इरफान की कार का था। यातायात पुलिस ने बाइक सवार की फोटो लेकर रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर चालान जारी कर दिया। इरफान ने जब इस बारे में पूर्णिया यातायात थाना में शिकायत की, तो अधिकारियों ने कोई सुनवाई नहीं की और जुर्माना भरने का निर्देश दिया।
सिस्टम की गलती पर भी नहीं मिली राहत
कार मालिक ने बताया कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों को कई बार समझाया कि उनकी गाड़ी कार है, बाइक नहीं और वह पूर्णिया गए ही नहीं थे। इसके बावजूद अधिकारियों ने चालान रद्द करने या सुधारने से इन्कार कर दिया। थक-हारकर इरफान ने अब इस मामले को लेकर लिखित शिकायत दी है और न्याय की मांग की है।
सवालों के घेरे में है बिहार का चालान सिस्टम
इस घटना ने बिहार में ई-चालान व्यवस्था की विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या बिना सही सत्यापन के सिर्फ नंबर प्लेट देखकर चालान करना उचित है। क्या इस तरह की कार्रवाई से सरकार राजस्व घाटा पूरा करेगी।
सरकार पर उठे सवाल, आम जनता परेशान
बिहार में पहले से ही लोग ई-चालान प्रणाली को लेकर असमंजस में हैं, अब इस तरह की घटनाएं जनता के बीच डर और अविश्वास का माहौल पैदा कर रही हैं। सवाल यह भी है कि जब सिस्टम की गलती होती है, तब भी आम नागरिकों को दंड क्यों भुगतना पड़ता है।

