Jamshedpur : बॉलीवुड और साउथ सिनेमा के जाने-माने अभिनेता आर. माधवन को देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में से एक पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा। आर माधवन को पद्मश्री दिए जाने का एलान रविवार को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर सरकार की तरफ से किया गया।

अपने अभिनय, सादगी और बहुमुखी प्रतिभा से दर्शकों का दिल जीतने वाले माधवन का झारखंड के जमशेदपुर से गहरा नाता रहा है। बहुत कम लोग जानते हैं कि फिल्मों में आने से पहले उनका बचपन और स्कूली जीवन जमशेदपुर में बीता है।
माधवन झारखंड के जमशेदपुर कदमा स्थित डीबीएमएस स्कूल के छात्र रहे हैं। स्कूल की प्राचार्य रजनी शेखर बताती हैं कि छात्र जीवन में वे काफी नटखट और चंचल स्वभाव के थे। पढ़ाई में औसत होने के बावजूद खेलकूद, नाटक, डांस और सिंगिंग जैसी गतिविधियों में उनकी भागीदारी हमेशा सराहनीय रहती थी।
बताते हैं कि स्कूल की संस्थापक भानुमति नीलकंठन ने उनके व्यक्तित्व को निखारने में अहम भूमिका निभाई। ऐसा माधवन खुद भी मानते रहे हैं। कई इंटरव्यू में उन्होंने स्वीकार किया है कि उनके जीवन को सही दिशा देने में उनका बड़ा योगदान रहा है।
एक बार स्कूल के स्वर्ण जयंती समारोह में माधवन को आमंत्रित किया गया था। व्यस्तता के कारण वे खुद तो नहीं आ सके, लेकिन उन्होंने पांच मिनट का एक वीडियो संदेश भेजा, जिसमें अपने स्कूली दिनों से लेकर फिल्मी सफर तक की यादें साझा कीं। समारोह में मौजूद लोग उस वीडियो को देखकर भावुक हो गए थे।
दिलचस्प बात यह है कि मशहूर फिल्म निर्देशक इम्तियाज अली भी उनके ही बैचमेट रहे हैं। दोनों ने वर्ष 1990 में आइएससी पास किया था।
माधवन के पिता एस. रंगनाथन टाटा स्टील में मैनेजमेंट एग्जीक्यूटिव और मां सरोजा रंगनाथन बैंक ऑफ इंडिया में मैनेजर थीं। जमशेदपुर में पले-बढ़े माधवन ने आगे की पढ़ाई के लिए महाराष्ट्र का रुख किया और कोल्हापुर में पब्लिक स्पीकिंग सिखाने लगे। इसी दौरान उन्हें वर्ष 1996 में जीटीवी के शो ‘बनेगी अपनी बात’ में पहला मौका मिला। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
करीब तीन दशक के करियर में माधवन ने छह भाषाओं में 45 से अधिक फिल्मों में काम किया है। मणिरत्नम की फिल्म ‘अलैपायुथे’ से उन्हें व्यापक पहचान मिली। इसके बाद ‘रहना है तेरे दिल में’, ‘रंग दे बसंती’, ‘3 इडियट्स’, ‘तनु वेड्स मनु’ जैसी कई हिट फिल्मों ने उन्हें दर्शकों का चहेता बना दिया।
कम लोग जानते हैं कि 22 वर्ष की उम्र में वे महाराष्ट्र के सर्वश्रेष्ठ एनसीसी कैडेटों में शामिल थे और उन्हें इंग्लैंड जाने का अवसर भी मिला था।
आज पद्मश्री सम्मान से नवाजे जाने जा रहे आर. माधवन की सफलता की कहानी यह साबित करती है कि जमशेदपुर की गलियों से निकलकर भी सपनों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई जा सकती है। उनके स्कूल और शहर को आज उन पर गर्व है।

