विपक्ष के नेता के तौर पर पहली बार अमेरिका पहुंचे राहुल गांधी ने अपने बयानों की बौछार से राजनीति में उबाल ला दिया है।
इस यात्रा के दौरान राहुल ने भरतीय पॉलिटिक्स से लेकर बेरोजगारी व इकोनॉमी तक जैसे विषयों पर चर्चा की।
अमेरिकी मंच से राहुल ने आएसएस व भाजपा पर भी निशाना साधा। कांग्रेस नेता ने कहा कि संघ को लगता है कि देश में केवल एक ही विचारधारा है, जब कि मेरा मानना है कि सभी को सपने देखने का पूरा हक है।
जाति, धर्म, परंपरा व इतिहास की परवाह किए बिना सभी को समान अवसर दिया जाना चाहिए।
उन्होने कहा कि इस बार के चुनाव में भारत की जनता ने अपने बहुमत से स्पष्ट कर दिया कि भारत के प्रधानमंत्री संविधान का हनन कर रहे है।
अपने तीन दिन के दौरे पर कांग्रेस नेता छात्रों के साथ संवाद करेंगे। बीजेपी-आरएसएस के अलावा उन्होने चुनाव आयोग पर भी कई गंभीर आरोप लगाए।
जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के अपने भाषण में राहुल ने कहा कि इस बार के चुनाव निष्पक्ष रुप से नहीं हुए।
चुनाव आयोग बीजेपी के इशारे पर काम कर रहा था।
अगर ऐसा होता तो भाजपा 240 सीटों के आसपास भी नहीं पहुंच पाती। हमारे बैंक खाते बंद कर दिए गए थे। उन्होने आरएसएस पर आरोप लगाते हुए कहा कि बड़े-बड़े संस्थानों में इनका कब्जा है।
मीडिया से लेकर जांच एजेंसी तक पर इनका दबदबा है। जाति जनगणना का मुद्दा भी बड़ा हो गया। भारत में दलितों व ओबीसी को उनका हक नहीं मिल रहा है।
2024 के लोकसभा चुनाव के बाद लोगों का डर खत्म हो गया है। अब सब खत्म हो गया है, 56 इंच का सीना, भगवान से सीधा संबंध, उनका विचार।
इसके बाद जब राहुल अमेरिका के वर्जीनिया में एक कार्यक्रम में पहुंचे तो वहां भारत के सिखों पर बयानबाजी की। उन्होने कहा कि क्या सिखों को भारत में पगड़ी व कड़ा पहनने की इजाजत है। उनके इस बयान से सिख समुदाय नाराज है।
हांला कि इस बयान के पलटवार पर बीजेपी नेता गिरिराज सिंह और आरपी सिंह ने कहा कि कांग्रेस की सरकार में ही 3000 सिखों का कत्लेआम हुआ।
उन्होने राहुल गांधी को चुनौती देते हुए कहा कि यही बात वो भारत आकर कहें। उनके खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा। गिरिराज सिंह ने कहा कि जिन्होने कत्लेआम किया कि वो आज पाठ पढ़ा रहे है।
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