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Ramgarh News : रजरप्पा मां छिन्नमस्तिका मंदिर पहुंचे मॉरीशस के पूर्व उप PM की बेटी और दामाद, हुआ भव्य स्वागत

Jharkhand Hindi News : मंदिर में पूजा अर्चना कर की सभी की सुख समृद्धि की कामना

by Mujtaba Haider Rizvi
Ramgarh News
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Ramgarh: मॉरीशस के पूर्व उप प्रधानमंत्री की बेटी सचिता बुद्ध और दामाद अजय बुद्ध शनिवार को रजरप्पा स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर पहुंचे। मंदिर में उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना कर मां छिन्नमस्तिका के चरणों में शीश झुकाया और सभी की सुख-समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर स्थानीय श्रद्धालुओं और ग्रामीणों ने उनका भव्य स्वागत किया।

पूजन के बाद सचिता बुद्ध ने कहा कि प्राकृतिक सौंदर्य की गोद में बसे मां के दरबार में आकर उन्हें बेहद शांति का अनुभव हो रहा है। वहीं अजय बुद्ध ने इसे अपनी “जड़ों से जुड़ने” का भावनात्मक लम्हा करार दिया। उन्होंने कहा कि यहां आकर पहचान और विकास की नई प्रेरणा मिल रही है।

अजय बुद्ध ने बताया कि उनके पूर्वज तकरीबन 110 वर्ष पहले गन्ने के खेतों में मजदूरी के लिए मॉरीशस गए थे। उस दौर में बिहार और उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग मॉरीशस पहुंचे, जिन्होंने समय के साथ वहां सामाजिक और सियासी पहचान बनाई। भारतीय मूल के लोगों की सियासत में मजबूत हिस्सेदारी तब और मजबूत हुई, जब डॉ. हरीश बुद्ध उप प्रधानमंत्री बने। उनके कार्यकाल में समाज सुधार, प्रशासनिक सुधार और भारत-मॉरीशस के सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने पर खूब काम हुआ। प्रवासी भारतीय विरासत को सम्मान दिलाने में उनका अच्छा योगदान रहा। इससे दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा मिली। इसी वजह से मॉरीशस को “छोटा भारत” भी कहा जाता है।

हजारीबाग जिले के रहने वाले हैं मॉरीशस के पूर्व प्रधानमंत्री

पूर्व उप प्रधानमंत्री डॉ. हरीश बुद्ध इससे पहले दो बार अपने पैतृक गांव हजारीबाग जिले के बड़कागांव प्रखंड स्थित सिमरातरी आ चुके हैं। पहली बार 1986 में और दूसरी बार 1991 में वे पत्नी सरिता बुद्ध के साथ गांव पहुंचे थे। उस दौरान उन्होंने क्षेत्रीय विकास के लिए हजारीबाग में एक ट्रस्ट का गठन किया और बेटियों की शिक्षा को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाया। उनकी प्रेरणा से बड़कागांव में बालिका उच्च विद्यालय की स्थापना हुई।

ईस्ट इंडिया कंपनी के जरिए मॉरीशस पहुंचे थे डॉक्टर हरीश

बताया जाता है कि डॉ. हरीश बुद्ध के पूर्वज बुद्ध महतो को महज 16 वर्ष की आयु में अंग्रेज (ईस्ट इंडिया कंपनी) मजदूरी के लिए मॉरीशस ले गए थे। डॉ. हरीश बुद्ध 1982 में मॉरीशस के उप प्रधानमंत्री बने थे और इसके बाद अपने पूर्वजों के घर की तलाश करते हुए भारत यात्रा पर गांव पहुंचे थे।

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