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The Photon News Exclusive : रांची के कांके थानेदार… विभागीय कार्यवाही के बावजूद चल रही है थानेदारी : Kanke Police Station

Jharkhand Police : रांची के कांके थानेदार प्रकाश रजक के ख़िलाफ़ एक मामले में विभागीय कार्रवाई चल रही है। इस मामले में नियमों की अनदेखी हो रही है। जाँच के दौरान अनुशासनात्मक प्रक्रिया निष्पक्ष और बिना प्रभाव के पूरी की जा सके, इसके लिए पद से हटाने का नियम है। इसे लेकर सीएम हेमंत सोरेन, डीजीपी और रांची एसएसपी से भी शिकायत की गई है। थानेदार के प्रभाव का 'द फोटोन न्यूज' ने उठाया था मुद्दा।

by Suhaib
Kanke Police Station
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Ranchi News : रांची : रांची के कांके थानेदार प्रकाश रजक के खिलाफ चल रही विभागीय कार्यवाही की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। चूंकि, विभागीय कार्यवाही के दौरान प्रकाश रजक को उसी थाने में थानेदार के पद पर बनाए रखते हुए कार्यवाही शुरू की गई है। हालंकि, नियम कुछ और बता रहे हैं। झारखंड सरकारी सेवक नियमावली 2016 के नियम 9(1)(ए) के अनुसार, किसी सरकारी अफसर पर अगर अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित हो या चल रही हो तो उसे निलंबित करने या हटाने का नियम है।

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ऐसा इसलिए, ताकि किसी भी कारण से जांच प्रभावित न हो। इस मामले में तो नियमों की भी अनदेखी की जा रही है। इसी नियम का हवाला देकर द ग्रुप फॉर जस्टिस की ओर से सीएम हेमंत सोरेन, डीजीपी तदाशा मिश्रा और रांची के एसएसपी राकेश रंजन से शिकायत की गई है। इसमें बताया गया है कि विभागीय कार्यवाही जारी रहने के बावजूद कांके थानेदार उसी पद पर आसीन हैं, जिस पद पर रहते हुए उन पर गड़बड़ियों के आरोप लगाए गए थे। कार्यवाही के बीच थानेदार कांके थाना का कमान संभाले हुए हैं। गौरतलब है कि झारखंड हाईकोर्ट में दामोदर नाथ शाहदेव की ओर से दायर हैवियस कॉर्पस याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कांके थानेदार पर विभागीय कार्यवाही शुरू किए जाने की जानकारी दी गई है।

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खबर सामने आने के बाद देखी गई तीखी प्रतिक्रिया

थानेदार के प्रभाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कांके थाना से दो मुंशियों को हटाने का जो आदेश जारी हुआ था, वह कुछ ही समय के भीतर वापस ले लिया गया। इन सवालों को लेकर भी सीएम और डीजीपी को ट्वीट किए गए।

‘द फोटोन न्यूज’ ने 18 जनवरी के अंक में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। ‘कांके थाना के दो मुंशियों को हटाने का कटा कमान, 24 घंटे के भीतर वापस’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की गई थी। खबर सामने आने के बाद तीखी प्रतिक्रिया भी देखने को मिली।

Jharkhand Government Servant Rules 2016 : क्या कहती है राज्य की सरकारी सेवक नियमावली


झारखंड सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियमावली 2016 के नियम 9(1)(ए) के अनुसार, सक्षम अफसर को यह अधिकार प्राप्त है कि वह किसी सरकारी सेवक को निलंबित कर सकता है, यदि उसके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित हो या उस पर विचार किया जा रहा हो। यह प्रावधान इस उद्देश्य से किया गया है, ताकि जांच या अनुशासनात्मक प्रक्रिया निष्पक्ष, प्रभावी और बिना किसी बाहरी या आंतरिक प्रभाव के पूरी की जा सके।

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इससे यह सुनिश्चित होता है कि संबंधित कर्मी अपने पद का दुरुपयोग कर जांच को प्रभावित न कर सके। नियम के तहत निलंबन का आदेश लिखित रूप में जारी किया जाना अनिवार्य है। निलंबन को दंड नहीं माना जाता, बल्कि इसे प्रशासनिक आवश्यकता के रूप में देखा जाता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि संबंधित कर्मी अपने पद का दुरुपयोग कर जांच को प्रभावित न कर सके।

एसएसपी, रांची का वर्जन

ग्रुप फॉर जस्टिस की ओर से जो शिकायत प्राप्त हुई है, उसकी विधिवत जांच की जाएगी। पूरे मामले की समीक्षा और तथ्यों की पड़ताल की जाएगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
-राकेश रंजन, एसएसपी, रांची।

High Court Jharkhand : क्या है एडवोकेट का बयान

किसी थाना प्रभारी पर विभागीय कार्यवाही चलना एक संवेदनशील मामला है। ऐसे में थानदोर का पद पर बने रहना, खासकर जब उसी पद पर रहते हुए गड़बड़ी के आरोप लगे हों,जांच को प्रभावित कर सकता है। इसलिए जांच के दौरान निलंबन करने का नियम है।
-प्रियंका कुमारी, एडवोकेट, हाईकोर्ट।

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