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Ranchi News : रांची में नगर निगम की गलती का खमियाजा भुगतेंगे 40 परिवार, घरों पर चलाया जाएगा बुलडोजर

Jharkhand Hindi News : साल 1990 में नगर निगम ने लोगों को दिए थे निर्मित मकान, अब खाली करने का थमा दिया नोटिस, लोगों में हड़कंप

by Mujtaba Haider Rizvi
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Ranchi : रांची के खादगढ़ा महुआ टोली क्षेत्र में रहने वाले करीब 40 गरीब परिवारों को नगर निगम ने घर खाली करने का नोटिस थमा दिया है। इन मकानों को नगर निगम बुलडोजर लगा कर तोड़ने जा रहा है। नगर निगम ने ही इन मकानों को बनवाया था और गरीब परिवारों को रहने के लिए दिया था। मगर, अब नगर निगम का कहना है कि यह मकान जिस जमीन पर बनाए गए थे वह निगम की नहीं थी। इसलिए, हाईकोर्ट के आदेश पर कार्रवाई हो रही है। मगर यहां के रहने वालों का कहना है कि यह गलती नगर निगम की थी। इस पर गरीब परिवार क्यों भुगतें। लोगों का कहना है कि नगर निगम उन लोगों को पहले कहीं मकान बना कर दे। इसके बाद यह घर खाली कराए।

इस तरह, एक बार फिर बेघर होने का खतरा मंडरा रहा है। जिन मकानों में ये परिवार पिछले 30 से 35 वर्षों से रह रहे हैं, अब उन्हीं मकानों को तोड़ने की तैयारी रांची नगर निगम ने शुरू कर दी है। बताया गया है कि वर्ष 1990 में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के निर्देश पर गरीब और बेसहारा परिवारों को बसाने के लिए इस इलाके में पक्के मकानों का निर्माण कराया गया था। तब से लेकर अब तक ये परिवार यहीं रह रहे हैं, लेकिन आज तक उन्हें मकानों का पक्का मालिकाना हक नहीं मिल सका।

नगर निगम की ओर से हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए प्रभावित परिवारों को 15 जनवरी तक मकान खाली करने का नोटिस दिया गया है। निगम का कहना है कि जिस जमीन पर मकान बने हैं, वह उसकी नहीं थी, इसलिए निर्माण को अवैध माना जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई परिवार पिछले तीन दशकों से यहां रह रहे हैं। कुछ मकानों पर होल्डिंग टैक्स भी लिया जा रहा है, वहीं बिजली और पानी के कनेक्शन भी वर्षों से जारी हैं। इसके बावजूद अब इन्हें अवैध करार देकर तोड़ने की तैयारी की जा रही है।

जानकारी के अनुसार कुल 40 मकानों को तोड़े जाने की योजना है, जिनमें से करीब 30 मकानों को पहले होल्डिंग नंबर और जमीन आवंटन भी दिया गया था। इससे लोगों में भारी आक्रोश और असुरक्षा का माहौल है। इलाके के निवासियों का कहना है कि सरकार ने ही उन्हें घर दिया था और अब वही घर छीने जा रहे हैं। गरीब परिवारों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि वे जाएं तो जाएं कहां।

मकान टूटने की आशंका से परिवारों की स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है। न बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान रह गया है और न ही बुजुर्गों और महिलाओं को चैन की नींद मिल पा रही है। लोग लगातार प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।

स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि मकान टूटने की सूचना मिलने के बाद 55 वर्षीय एक बुजुर्ग की सदमे से मौत हो गई। लोगों का कहना है कि नगर निगम द्वारा लगातार गरीबों को परेशान किया जा रहा है। न उन्हें ठेला लगाने दिया जाता है और न ही सिर पर छत सुरक्षित रहने दी जा रही है।

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