RANCHI: राजधानी में स्मार्ट सिटी के तहत शहरवासियों को पर्यावरण के अनुकूल और सस्ती परिवहन सुविधा देने के उद्देश्य से शुरू की गई साइकिल शेयरिंग योजना अब दम तोड़ रही है। कभी शहर की सड़कों पर हर उम्र के लोग इन साइकिलों से सफर करते दिखाई देते थे। लेकिन अब हालात यह हैं कि कई साइकिल स्टैंड पर साइकिलें नदारद हैं। वहीं शहर में बनाए गए कई स्टैंड पूरी तरह भगवान भरोसे छोड़ दिए गए हैं। जिससे समझा जा सकता है कि कैसे इस साइकिल शेयरिंग प्रोजेक्ट की हवा निकल गई है।
प्रमुख जगहों पर बनाए गए थे स्टैंड
शहर के प्रमुख चौराहों, पार्कों, शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों के पास बनाए गए साइकिल स्टैंड कभी इस योजना की पहचान थे। प्रति घंटे के हिसाब से साइकिल लेकर लोग छोटी दूरी की राइड किया करते थे। खासकर युवा, छात्र और फिटनेस को लेकर जागरूक लोग इस सुविधा का जमकर इस्तेमाल कर रहे थे। इतना ही नहीं, कई लोग पूरे महीने का पैकेज लेकर नियमित रूप से साइकिल राइडिंग करते थे। जिससे कि युवाओं को सबसे ज्यादा लाभ मिल रहा था। बाहर से आकर पढ़ाई करने वालों को इससे बड़ी राहत मिली थी।

रख रखाव नहीं होने से बर्बाद
लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। अधिकांश स्टैंड पर या तो साइकिलें उपलब्ध नहीं हैं या फिर जो साइकिलें हैं, वे खराब हालत में पड़ी हुई हैं। कहीं टायर पंचर हैं तो कहीं ब्रेक काम नहीं कर रहे। कहीं चेन जाम है तो कहीं सीट टूटी हुई। रखरखाव की लगातार अनदेखी ने लोगों का इस योजना से भरोसा तोड़ दिया है। शुरुआत में साइकिल शेयरिंग को लेकर काफी उत्साह था। स्मार्ट सिटी की पहचान के रूप में इसे देखा जा रहा था। लोग कार और बाइक छोड़कर छोटी दूरी के लिए साइकिल का इस्तेमाल कर रहे थे। इससे न सिर्फ प्रदूषण कम हो रहा था बल्कि ट्रैफिक का दबाव भी घटा था। लेकिन समय के साथ योजना पर ध्यान देना बंद कर दिया गया।
सिस्टम हो गया फेल
कई साइकिल स्टैंड ऐसे हैं जहां मशीनें खराब पड़ी हैं। लॉक सिस्टम काम नहीं करता और ऐप के जरिए बुकिंग में भी परेशानी आती है। लोगों का कहना है कि कई बार ऐप में साइकिल उपलब्ध दिखती है, लेकिन स्टैंड पर पहुंचने पर वहां एक भी साइकिल नहीं मिलती। इस वजह से लोग बार-बार निराश होकर लौटने लगे और धीरे-धीरे उन्होंने इस सुविधा का इस्तेमाल ही बंद कर दिया। कुछ स्टैंड तो नालों के ऊपर बना दिए गए हैं। जिससे साइकिल रहने के बावजूद लोग नहीं लेते। इसके अलावा कुछ जगहों पर स्टैंड ऊंचाई पर बना दिया गया है। जिस पर साइकिल ही नहीं रखे जा सकते। ये केवल दिखावे के लिए है।

चलाना होगा जागरूकता अभियान
शहर के पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि अगर साइकिल शेयरिंग योजना को गंभीरता से लिया जाए तो यह आज भी सफल हो सकती है। इसके लिए जरूरी है कि साइकिलों का नियमित रखरखाव हो, स्टैंड की निगरानी की जाए और खराब सिस्टम को जल्द ठीक किया जाए। साथ ही लोगों को फिर से जोड़ने के लिए जागरूकता अभियान चलाना भी जरूरी है।फिलहाल स्मार्ट सिटी की यह महत्वाकांक्षी योजना कागजों तक सिमटती नजर आ रही है। जिस साइकिल शेयरिंग को शहर की स्मार्ट पहचान बनना था, वही अब बदहाली की तस्वीर पेश कर रही है। सरकार ने धुर्वा इलाके में तो साइकिल ट्रैक भी बनाया। लेकिन योजना बेपटरी होती जा रही है।

