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RCB Victory Parade : जश्न मनाने वाले खिलाड़ी भी गए, क्रेडिट लेने वाले नेता भी… बच गया 11 परिवारों का दर्द और जूते-चप्पलों का अंबार!

by Rakesh Pandey
RCB Victory Parade
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बेंगलुरु : 13 साल की दिव्यांशी, 19 साल की साहना, 20 साल का भौमिक और 21 साल का श्रवण… ये सिर्फ नाम नहीं हैं, ये वो चेहरे हैं जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। गत बुधवार को बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में RCB की जीत का जश्न मातम में बदल गया, जब भीड़ बेकाबू हुई और भगदड़ में 11 लोगों की जान चली गई। हादसे में 30 से ज्यादा लोग घायल हुए। ये किसी धार्मिक आयोजन की भीड़ नहीं थी, न ही कोई राजनीतिक रैली। यह था एक IPL टीम की जीत का उत्सव, जिसने कई घरों को उजाड़ दिया।

क्रेडिट लेने वाले नेता, लेकिन जिम्मेदारी किसी की नहीं

रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने 18 साल बाद अपना पहला आईपीएल खिताब जीता । इसमें कोई शक नहीं कि ये जीत ऐतिहासिक थी। लेकिन जब इस जश्न में सरकारें शामिल हो जाती हैं, जब नेता क्रेडिट लेने के लिए सामने आ जाते हैं, तो आयोजन की जिम्मेदारी भी उनकी होनी चाहिए। स्टेडियम की क्षमता 35,000 की थी, लेकिन वहां पहुंच गए तीन लाख से ज्यादा लोग।

साफ है कि प्रशासन न तो इसके लिए तैयार था और न ही व्यवस्था के लिहाज से जिम्मेदारी उठाने को तैयार। नतीजा 11 परिवारों की तबाही और सड़कों पर बिखरे जूते-चप्पलों का अंबार। जब अंदर स्टेडियम में IPL ट्रॉफी के साथ जश्न का शोर था, उसी समय बाहर स्टेडियम की दीवारों से टकराती चीखें थीं। लोग गिर रहे थे, कुचले जा रहे थे और सड़कों पर तड़प रहे थे। भीड़ में से कुछ भाग्यशाली थे जो अस्पताल तक पहुंच सके, लेकिन कई तो ऐसे थे जो भीड़ के पैरों तले कुचले गए और वहीं दम तोड़ दिया।

गेट तोड़े गए, भीड़ बेकाबू हुई और मच गया कोहराम

चश्मदीदों के मुताबिक, पुलिस ने भीड़ को गेट नंबर 7 पर बुलाया, लेकिन 2 घंटे इंतजार के बाद भी गेट नहीं खोला गया। तभी किसी ने कहा कि रोड शो रद्द हो गया है और सबको अंदर बुलाया गया है। महिलाएं भीड़ के साथ गेट पर चढ़ गईं, लोग दरवाजे तोड़कर एक साथ घुसने लगे और देखते ही देखते भगदड़ मच गई। 600-700 लोगों ने जबरन गेट तोड़ने की कोशिश की। भीड़ इतनी थी कि पुलिस भी कुछ नहीं कर सकी। चीख-पुकार, घुटन और गिरती-रौंदी जाती लाशें — हर ओर हाहाकार था।

इकलौता बेटा खोने का दर्द, जो वापस नहीं आएगा

एक पीड़ित पिता की आवाज़ टूटती हुई थी। उसने कहा कि आपकी लापरवाही के कारण मैंने अपना 22 साल का इकलौता बेटा खो दिया… मुझे उसका शव दे दो। वह मुझे बताए बिना यहां आ गया था… लेकिन अब वह लौटेगा नहीं। यह सिर्फ एक पिता का दर्द नहीं, वो 11 परिवारों की पीड़ा थी जो हमेशा के लिए जिंदा रह गई।

जब बाहर चीखें थीं, अंदर चलता रहा जश्न

हैरत की बात ये रही कि हादसे की सूचना मिलने के बावजूद स्टेडियम के अंदर RCB के खिलाड़ियों और मंत्रियों का जश्न जारी रहा। कार्यक्रम छोटा किया गया, लेकिन रोका नहीं गया। जब सब चले गए — खिलाड़ी, नेता, कैमरे — तब भी स्टेडियम के बाहर जूते-चप्पल बिखरे पड़े थे, जैसे चीख-चीख कर कह रहे हों कि यहां कुछ हुआ है जो सिर्फ खबर नहीं, एक इतिहास है… दर्द का इतिहास।

सरकारी मुआवजा और जांच के आदेश

राज्य सरकार ने हादसे में मारे गए प्रत्येक व्यक्ति के परिवार को 10 लाख मुआवजा देने का ऐलान किया है। साथ ही मजिस्ट्रेट से जांच कराने के आदेश भी दे दिए गए हैं।

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