सेंट्रल डेस्क: जाने-माने अर्थशास्त्री बिबेक देबराय का 69 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वह प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन रह चुके हैं। पद्मश्री अवॉर्ड से सम्मानित देबराय ने हाल ही में कुलपति अजीत रानाडे के पक्ष में अदालत की ओर से दिए गए एक फैसले के बाद गोखले इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स एंड इकोनॉमिक्स के चांसलर का पद छोड़ दिया था।

कोर्ट के फैसले के बाद छोड़ दिया था चांसलर का पद
सितंबर में, बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा कुलपति अजीत रानाडे को अंतरिम राहत दिए जाने के बाद, उन्होंने पुणे स्थित गोखले इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स एंड इकोनॉमिक्स (जीआईपीई) के चांसलर के रूप में पद छोड़ दिया। अजीत रानाडे को पहले कुलपति पद से बर्खास्त किया गया था। इसी मामले को लेकर सुनवाई चल रही थी।
देबरॉय ने भारत बौद्धिक परिदृश्य पर अमिट छाप छोड़ी: मोदी
उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक व्यक्त किया औऱ उनकी तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि वे एक महान विद्वान थे। एक्स पर पोस्ट करते हुए पीएम मोदी ने लिखा कि देबरॉय एक महान विद्वान थे, जो अर्थशास्त्र, इतिहास, राजनीति, संस्कृति और अद्यात्म जैसे विविध क्षेत्र में पारंगत थे। अपने काम के जरिए उन्होंने भारत के बौद्धिक परिदृश्य पर एक अमिट छाप छोड़ी। सार्वजनिक नीति में योगदान के अलावा उन्हें हमारे प्राचीन ग्रंथों में काम करना और उन्हें युवाओं के लिए सुलभ बनाना पसंद था।
संपादक व सलाहकार के पद पर दे चुके थे योगदान
उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया था। वे कई न्यूज पेपर में योगदान संपादक एवं सलाहकार के पद पर भी कार्यरत रह चुके है। उन्होंने रामकृष्ण मिशन स्कूल, प्रेसीडेंसी कॉलेज, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और ट्रिनिटी कॉलेज से अपनी शिक्षा पूरी की थी। कई समाचार पत्रों के लिए उन्होंने किताबें, शोधपत्र एवं लेख भी लिखे और संपादित किए है।
महाभारत के संक्षिप्त संस्करण का किया था अंग्रेजी अनुवाद
देबरॉय ने 10 खंडों की श्रृंखला में महाभारत के संक्षिप्त संस्करण का अंग्रेजी में अनुवाद किया था। उन्होंने भगवद गीता, हरिवंश, वेदों और वाल्मिकी की रामायण (तीन खंडों में) का भी अनुवाद किया था।
रह चुके थे नीति आयोग के सदस्य
अपने प्रोफेशनल करियर की शुरूआत उन्होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज, कोलकाता और फिर भारतीय विदेश व्यापार संस्थान, दिल्ली से की थी। इसके अलावा वे वित्त मंत्रालय में कानूनी सुधारों पर यूएनडीपी परियोजना के निदेश कभी रह चुके है। अपने जीवन में कई विभिन्न पदों पर कार्य कर चुके देबरॉय 5 जून 2019 तक नीति आयोग के भी सदस्य रह चुके थे।

