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JHARKHAND HEALTH NEWS: मरीजों के लिए लाइफलाइन बनेगा सदर हॉस्पिटल रांची, बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट के लिए विभाग ने दिए 6 करोड़

ब्लड ट्रांसफ्यूजन की झंझट से सिकल सेल, थैलेसीमिया के मरीजों को मिलेगा छुटकारा

by Vivek Sharma
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RANCHI: सदर हॉस्पिटल रांची अब राज्य का इकलौता अस्पताल बनेगा, जहां बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने विंग बनाने के लिए 6 करोड़ रुपये आवंटित कर दिया है। विभाग के इस कदम से सिकल सेल और थैलेसीमिया जैसे गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए के लिए ये वरदान साबित होगा। झारखंड के कई हिस्सों में सिकल सेल और थैलेसीमिया जैसी खून से जुड़ी बीमारियां व्यापक रूप से पाई जाती हैं। यह बीमारी ट्राइबल कम्युनिटी में विशेष रूप से अधिक है। वहीं मरीजों को खून चढ़ान के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ता है। अब सदर हॉस्पिटल में बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट की शुरुआत से ऐसे मरीजों को एक नई उम्मीद मिलेगी। वहीं मरीज पूरी तरह से रिकवर भी हो सकेंगे। बता दें कि सदर राज्य का इकलौता सरकारी हॉस्पिटल होगा जहां बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा मिलेगी।

ब्लड ट्रांसफ्यूजन के बिना इलाज की सुविधा

सिकल सेल और थैलेसीमिया जैसी बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए सबसे बड़ी समस्या ब्लड ट्रांसफ्यूजन की है। इन बीमारियों में मरीजों को नियमित रूप से खून चढ़ाने की जरूरत होती है, जो समय लगने के खर्चीला साबित होता है। सदर हॉस्पिटल में बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट के शुरू होने से मरीजों को इस झंझट से छुटकारा मिलेगा। बोन मैरो ट्रांसप्लांट एक स्थायी इलाज हो सकता है, जिससे मरीजों को बार-बार ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत नहीं पड़ेगी।

डे केयर सेंटर से मरीजों को राहत

डॉ अभिषेक रंजन ने बताया कि हॉस्पिटल में 40 बेड का डे केयर सेंटर का संचालन किया जा रहा है। जहां मरीजों को दिन में खून चढ़ाने के बाद छुट्टी दे दी जाती है। हर दिन 30 मरीज ब्लड ट्रांसफ्यूजन के लिए आते है। यह सुविधा खासतौर पर उन मरीजों के लिए मददगार साबित हो रही है जिन्हें लंबे समय के इलाज की जरूरत होती है, लेकिन उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती होने की जरूरत नहीं होती। खून चढ़ाने के बाद वे दवाएं लेकर चले जाते है।

आदिवासी समुदाय को मिलेगा खास लाभ

झारखंड में आदिवासी जनसंख्या बड़ी है। सिकल सेल और थैलेसीमिया जैसी बीमारियां इन समुदायों में अधिक पाई जाती हैं। ऐसे में, सदर हॉस्पिटल का बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट इन समुदायों के लिए एक वरदान साबित होगा। अब उन्हें इलाज के लिए अन्य शहरों या राज्य में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वहीं बेहतर सुविधाएं सदर में मिलने से उनका खर्च भी कम हो जाएगा। इसके अलावा परेशानियों से भी छुटकारा मिल जाएगा।

बाहर के डॉक्टर आने को तैयार

सिविल सर्जन डॉ प्रभात कुमार ने बताया कि सदर हॉस्पिटल को लेटेस्ट मेडिकल इक्विपमेंट्स से लैस किया जाएगा और उच्च गुणवत्ता की सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे। इसके अलावा मरीजों की देखभाल के लिए विशेषज्ञों की टीम बनाई जाएगी। जिससे कि मरीजों के इलाज में किसी भी प्रकार की कमी न हो। उन्होंने कहा कि अभी हमारे पास एक डॉक्टर उपलब्ध है। कई और भी डॉक्टर बाहर से आकर सेवाएं देने को तैयार है। जल्द ही हमारा यूनिट तैयार हो जाएगा।

8वें फ्लोर पर जगह चिन्हित

सदर हॉस्पिटल में ‘बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट’ अलग होगा और इसे सदर की नई बिल्डिंग के आठवें तल्ले पर बनाया जाएगा। ‘बोन मैरो ट्रांसप्लांट’ के लिए डॉ अभिषेक रंजन उपलब्ध है। सरकार जल्द ही अन्य डॉक्टरों की नियुक्ति करेगी। जिससे कि ब्लड कैंसर से जूझ रहे मरीजों को भी राहत मिलेगी।

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