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Sarna Dharma Delhi Visit : उलिहातू की मिट्टी, डोम्बारी बुरू की माटी और सरना ध्वज लेकर दिल्ली पहुंचेंगे श्रद्धालु

• धरती आबा की भूमि से दिल्ली तक पहुंचेगा सरना का पवित्र संदेश, पांच मई को दिल्ली के भारत मंडपम में दिखेगा आदिवासी अस्मिता का स्वरूप

by Anand Mishra
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खूंटी : जनजातीय गौरव और संस्कृति का प्रतीक सरना धर्म अब राजधानी दिल्ली तक अपनी पहचान को प्रखर करेगा। खूंटी जिले के 50 सरना धर्मावलंबी 5 मई को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम (प्रगति मैदान) में आयोजित संस्कृति जागरण महोत्सव में हिस्सा लेंगे। इस दौरान वे धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा के गांव उलिहातू का पवित्र जल, शहीद भूमि डोम्बारी बुरू की माटी और सरना धर्म का झंडा ‘सिंगबोंगा’ लेकर वहां पहुंचेंगे।

जनजातीय संस्कृति को मिलेगा मंच

यह महोत्सव विश्व जन जागृति मिशन के संस्थापक सुधांशु जी महाराज के जन्मोत्सव के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। इसमें देशभर के जनजातीय समुदायों की सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने और उसके संरक्षण पर चर्चा की जाएगी।

नेतृत्व करेंगे सरना समाज के बुद्धिजीवी

इस सांस्कृतिक यात्रा का नेतृत्व करेंगे अखिल भारतीय सरना समाज के वरिष्ठ सदस्य और पूर्व शिक्षक लेपा मुंडा एवं छोटराय मुंडा। यह समाज 1957 में गठित संगठन है, जो भगवान बिरसा मुंडा के विचारों और सरना धर्म की सनातन प्रकृति-पूजक परंपराओं को संरक्षित और प्रचारित करने का कार्य करता है।

सरना धर्म की सांस्कृतिक विशेषता

सरना धर्मावलंबी प्रकृति पूजा, सरना स्थलों की उपासना, और सामाजिक संस्कारों (जैसे जन्म संस्कार, कानबेधी, नामकरण, मृत्यु संस्कार आदि) का अनुसरण करते हैं। उनका जीवन प्रकृति के प्रति आस्था, सामूहिक जीवन और परंपरा आधारित सामाजिक अनुशासन पर आधारित है।

दिल्ली में सुधांशु महाराज से करेंगे मांग

खूंटी से दिल्ली पहुंचे सरना श्रद्धालु महोत्सव के मंच से सरना समाज की संस्कृति और पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाने के लिए सुधांशु जी महाराज से सहयोग की मांग करेंगे। यह पहल जनजातीय अधिकारों की मजबूती और सरना धर्म की संवैधानिक मान्यता की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से वर्तमान संघर्ष तक

  • उलिहातू : भगवान बिरसा मुंडा की जन्मभूमि, आदिवासी स्वाभिमान की प्रतीक।
  • डोम्बारी बुरू : वह शहादत भूमि, जहां अंग्रेजों के खिलाफ बिरसा मुंडा ने संघर्ष किया।
  • सिंगबोंगा झंडा : सरना धर्म का आध्यात्मिक प्रतीक, जो सूर्य और प्रकृति की आराधना को दर्शाता है।

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