नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को एक पॉडकास्ट में अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखने के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें अपनी प्राकृतिक प्रवृत्तियों से ऊपर उठकर काम करना पड़ता है, खासकर जब उन्हें कठिन और तनावपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना होता है।
2002 के गुजरात दंगों के बाद की स्थिति
मोदी ने 2002 के गुजरात चुनावों को अपनी “सबसे बड़ी परीक्षा” करार दिया। इस समय की स्थिति को याद करते हुए मोदी ने बताया, “मैं टीवी नहीं देखता था, लेकिन जब बाहर ढोल की आवाजें आईं, तो मुझे बताया गया कि हम दो तिहाई बहुमत से जीत रहे हैं। इससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ा। मैं चिंता या बेचैनी को नियंत्रित कर रहा था।”
उन्होंने 2002 के गोधरा ट्रेन अग्निकांड का जिक्र करते हुए बताया कि उस समय वे कैसे अपनी भावनाओं से ऊपर उठकर स्थिति का सामना कर रहे थे। मोदी ने कहा, “मैं गोधरा पहुंचने के लिए एकल इंजन वाले हेलीकॉप्टर से यात्रा करने को तैयार था, क्योंकि मुझे वहां जाना था।”
भावनात्मक तनाव का सामना करना
प्रधानमंत्री ने बताया कि वे उस समय मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी महसूस कर रहे थे। जब 2002 में गोधरा कांड हुआ, तब वे विधायक थे और तीन दिन बाद ही विधानसभा गए थे। “मैं बेचैन था, चिंतित था, लेकिन मुझे पता था कि मेरी स्थिति ऐसी थी जहां मुझे अपनी भावनाओं को नियंत्रित करना था,” मोदी ने कहा।
जीवन में कभी मृत्यु के बारे में नहीं सोचा
मोदी ने यह भी कहा कि वे कभी जीवन या मृत्यु के बारे में नहीं सोचते। उन्होंने बताया, “जब मैं मुख्यमंत्री बना तो मुझे यह देखकर हैरानी हुई कि मैंने यह पद कैसे प्राप्त किया। मेरी पृष्ठभूमि ऐसी थी कि अगर मैं शिक्षक बन जाता, तो मेरी मां गुड़ बांटती।”
मोदी की नेतृत्व क्षमता
प्रधानमंत्री मोदी की नेतृत्व क्षमता को लेकर उनकी बातें यह दर्शाती हैं कि वे कैसे मुश्किल समय में भी भावनात्मक रूप से खुद को स्थिर रखते हैं। वे मानते हैं कि जिम्मेदारी और मिशन में पूरी तरह से शामिल रहना ही इस प्रकार की कठिन परिस्थितियों से उबरने का सबसे प्रभावी तरीका है।
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