Home » इस राज्य के मदरसों में संस्कृत की पढ़ाई होगी अनिवार्य, बोर्ड अध्यक्ष ने की घोषणा

इस राज्य के मदरसों में संस्कृत की पढ़ाई होगी अनिवार्य, बोर्ड अध्यक्ष ने की घोषणा

कासमी ने यह भी बताया कि उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड के साथ पंजीकृत 416 मदरसों में पहले से ही एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू किया गया है, जिसके तहत 96.5% बच्चों ने सफलता प्राप्त की है।

by Rakesh Pandey
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

देहरादून : उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा में एक ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। राज्य के मदरसा शिक्षा बोर्ड के तहत पंजीकृत सभी मदरसों में संस्कृत पढ़ाई को अनिवार्य किया जाएगा। इस बात की घोषणा हाल ही में मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती शमून कासमी ने की। उन्होंने बताया कि जल्द ही राज्य संस्कृत शिक्षा विभाग के साथ एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे, जिसके तहत संस्कृत की पढ़ाई शुरू की जाएगी।

संस्कृत और अरबी के महत्व पर जोर

मुफ्ती कासमी ने संस्कृत और अरबी दोनों भाषाओं के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, “अगर मौलवी संस्कृत जानता है और पंडित अरबी, तो इससे बेहतर सांस्कृतिक और भाषाई संवाद क्या हो सकता है?” उन्होंने कहा कि संस्कृत शिक्षा विभाग के साथ चर्चाएं चल रही हैं और एमओयू को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने का प्रयास किया जा रहा है।
कासमी ने यह भी बताया कि उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड के साथ पंजीकृत 416 मदरसों में पहले से ही एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू किया गया है, जिसके तहत 96.5% बच्चों ने सफलता प्राप्त की है। उनका मानना है कि इस कदम से मदरसा शिक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाया जा सकेगा और छात्रों को इंजीनियर, डॉक्टर और सिविल सेवक बनने में मदद मिलेगी। पिछले एक साल में छात्रों को राष्ट्रीय स्तर पर कई नए अवसर भी मिले हैं, जिससे उनके भविष्य के करियर में सहायता मिलेगी।

चेयरमैन की आलोचना

हालांकि, इस फैसले की आलोचना भी हो रही है। वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स ने मदरसा बोर्ड के इस निर्णय पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मदरसा बोर्ड के पास यह अधिकार नहीं होना चाहिए कि वह तय करे कि बच्चे क्या पढ़ें। शम्स ने मदरसा बोर्ड को भंग करने की मांग की और जोर दिया कि मदरसों में पढ़ाई उत्तराखंड बोर्ड की गाइडलाइन्स और एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम के आधार पर होनी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि मदरसों में वही नियम लागू होने चाहिए जो मंदिरों और चर्चों पर लागू होते हैं। इसके साथ ही उन्होंने अल्पसंख्यक शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की आवश्यकता बताई। उत्तराखंड के मदरसों में संस्कृत पढ़ाई का निर्णय शिक्षा के क्षेत्र में एक नई दिशा का संकेत है। यह कदम जहां भाषा और सांस्कृतिक समझ को बढ़ावा देगा, वहीं इसे लेकर अलग-अलग विचार भी सामने आ रहे हैं।

Read Also- यूपी मदरसा एक्ट ‘असंवैधानिक’ घोषित , 560 मदरसों को पैसे मिलने हो जाएंगे बंद

Related Articles