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कर्नाटक उच्च न्यायालय ने लाडल मशक दरगाह में महाशिवरात्रि पूजा और उर्स दोनों की दी अनुमति

उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार, हिंदू श्रद्धालुओं को महाशिवरात्रि पर 2 बजे से 6 बजे तक पूजा-अर्चना व मुस्लिम समुदाय के सदस्य सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे उर्स से संबंधित अनुष्ठान करेंगे।

by Reeta Rai Sagar
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सेंट्रल डेस्क। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने महाशिवरात्रि के अवसर पर आलंद स्थित लाडल माशक दरगाह में शिवलिंग पर हिंदू श्रद्धालुओं को पूजा अर्चना करने की अनुमति दी है। यह निर्णय कर्नाटक वक्फ ट्रिब्यूनल के पहले के निर्देश को सही ठहराता है, जिसने इस स्थल पर धार्मिक अनुष्ठानों के लिए एक निर्धारित कार्यक्रम तय किया था। यह स्थल हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लिए ऐतिहासिक महत्व रखता है।

उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार, हिंदू श्रद्धालुओं को महाशिवरात्रि पर 2 बजे से 6 बजे तक शिवलिंग पर पूजा करने की अनुमति दी जाएगी, जबकि मुस्लिम समुदाय के सदस्य उर्स से संबंधित अनुष्ठान सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक करेंगे। अदालत ने इन निर्धारित समय सीमाओं का सख्ती से पालन करने की बात कही है ताकि सामुदायिक सद्भाव बनी रहे। इसके अलावा, अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि पूजा के दौरान स्थल में कोई अनधिकृत परिवर्तन न किए जाएं।

क्या महत्त्व है इस दरगाह का
लाडल माशक दरगाह, जो 14वीं शताब्दी के सूफी संत से जुड़ी हुई है, में राघव चैतन्य शिवलिंग भी स्थित है, जो 15वीं शताब्दी के हिंदू संत से जुड़ा हुआ है। ऐतिहासिक रूप से यह स्थल साम्प्रदायिक सद्भाव का प्रतीक रहा है। यहां दोनों धार्मिक समुदाय पूजा अर्चना करते रहे है। हालांकि, 2022 में धार्मिक अधिकारों को लेकर विवादों के कारण तनाव उत्पन्न हुआ था, जिसके परिणामस्वरूप साम्प्रदायिक अशांति फैल गई थी।

किसी भी संभावित अव्यवस्था को रोकने के लिए, जिला प्रशासन ने आलंद में धारा 144 लागू कर दी है, जिससे बड़ी सार्वजनिक सभाओं पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी है और 12 चेकपॉइंट्स पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की है, साथ ही ड्रोन के माध्यम से निगरानी रखी जा रही है। पुलिस अधीक्षक ईशा पंत ने बताया कि जब व्यापारियों को बंद करने का कोई आधिकारिक आदेश नहीं था, कई दुकानदारों ने एहतियात के तौर पर स्वेच्छा से अपनी दुकानें बंद कर दी है।

उपायुक्त यशवंत गुरुकर और वरिष्ठ कानून प्रवर्तन अधिकारियों को न्यायालय के आदेश को सुनिश्चित करने और शहर में शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पुलिस ने दरगाह के आसपास के इलाकों में भी सुरक्षा बढ़ा दी है।

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