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West Singhbhum : विश्व कल्याण आश्रम में शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती के सानिध्य में 10 जोड़ों का सामूहिक विवाह, भक्तों संग धूमधाम से मनाई होली

West Singhbhum : सनातन धर्म में 16 संस्कार बताए गए हैं, जिनमें विवाह संस्कार अत्यंत महत्वपूर्ण है। विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं बल्कि दो परिवारों और संस्कृतियों का पवित्र मिलन होता है।

by Rajeshwar Pandey
Mass Wedding and Holi Celebration at Vishwa Kalyan Ashram, West Singhbhum
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Chaibasa : पश्चिमी सिंहभूम जिले के आनंदपुर प्रखंड स्थित विश्व कल्याण आश्रम में गुरुवार को द्वारकाशारदा पीठ के जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज के सानिध्य में सामूहिक विवाह संस्कार का आयोजन किया गया। इस अवसर पर 10 जोड़ों का विवाह विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न कराया गया। विवाह के बाद नवदंपतियों ने शंकराचार्य स्वामी की चरण पादुका का पूजन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।

इस मौके पर शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने कहा कि सृष्टि की रचना के समय भगवान ब्रह्मा ने मनुष्य शरीर का निर्माण किया और उससे अत्यंत प्रसन्न हुए, क्योंकि मनुष्य ही ऐसा प्राणी है जो धर्म का पालन कर सकता है, रिश्तों की मर्यादा समझ सकता है और समाज को दिशा दे सकता है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में 16 संस्कार बताए गए हैं, जिनमें विवाह संस्कार अत्यंत महत्वपूर्ण है। विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं बल्कि दो परिवारों और संस्कृतियों का पवित्र मिलन होता है।

नव विवाहित जोड़ों को भेंट की गईं वस्तुएं

विश्व कल्याण आश्रम की ओर से सभी नवविवाहित जोड़ों को गृहस्थ जीवन की शुरुआत के लिए आवश्यक वस्तुएं भेंट की गईं। इसमें वर-वधू के लिए वस्त्र, श्रृंगार पेटी, अलमारी, पलंग, गद्दा, डिनर सेट, अंगूठी और मंगलसूत्र शामिल हैं। समारोह के दौरान वर और वधू पक्ष के परिजनों के साथ-साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी उपस्थित रहे। सभी के लिए आश्रम परिसर में नाश्ता और भोजन की व्यवस्था की गई थी।

नवविवाहित 10 जोड़ों की सूची

सामूहिक विवाह में संदीप सिंह (जलडेगा, सिमडेगा) – आरती कुमारी (बुरुकसाई, आनंदपुर), देवनारायण सिंह (हाटिंगहोड़े, बानो) – मीना कुमारी (बाहदा, आनंदपुर), हरीश सिंह (केतुंगा, लचरागढ़) – आरुणि कुमारी (लताकेल, बानो), चट्टान सिंह (घाघरा, मनोहरपुर) – पद्मा गुड़िया (सागजोड़ी, मनोहरपुर), मदनलाल महतो (सलडेगा, सिमडेगा) – मलिका कुमारी (कामडरा, गुमला), रतन मुंडा (तमाड़, रांची) – लखीमनी कुमारी (रुंघीकोचा, आनंदपुर), तारकेश्वर सिंह (बरसलोया, लचरागढ़) – दुर्गा कुमारी (बानो), रामचंद्र बड़ाइक (रुंघीकोचा, आनंदपुर) – सीता बड़ाइक (बेड़ातुलुंडा, आनंदपुर), कृष्णा लकड़ा (रेंगालबेड़ा, मनोहरपुर) – अलीशा किस्पोट्टा (उरकिया, मनोहरपुर) तथा राजा बाबू रजक (मनोहरपुर) – प्रिया दास (भालुडुंगरी, आनंदपुर) शामिल हैं।

भक्तों के साथ खेली होली, रंगोत्सव में झूमे श्रद्धालु

इसी क्रम में विश्व कल्याण आश्रम परिसर में जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज ने सैकड़ों भक्तों के साथ होली का उत्सव भी मनाया। इस दौरान भक्तों ने शंकराचार्य स्वामी पर रंग और गुलाल की बौछार कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। श्रद्धालुओं ने स्वामी जी की चरण पादुका पर अबीर-गुलाल अर्पित कर पूजा-अर्चना की और उत्साहपूर्वक होली खेली।

होली के इस पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ से आए लोकगीत कलाकारों ने पारंपरिक होली गीतों की प्रस्तुति दी, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रद्धालु गीतों की धुन पर झूमते हुए नाचते रहे और फूलों की वर्षा करते हुए उत्सव का आनंद लिया। इस मौके पर ब्रह्मचारी विश्वानंद, ब्रह्मचारी सचित स्वरूप, इंद्रजीत मल्लिक सहित आश्रम के कई कर्मी, स्वयंसेवक और श्रद्धालु उपस्थित रहे। हर वर्ष की तरह इस बार भी झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा सहित कई राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आश्रम पहुंचे थे।

छऊ नृत्य की प्रस्तुति ने मोहा मन

होली से पूर्व मंगलवार की संध्या को शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने भक्तों को आशीर्वचन दिया। इसके बाद सरायकेला से आए कलाकारों ने पारंपरिक छऊ नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। छऊ नृत्य की प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। शंकराचार्य स्वामी ने भी इस प्रस्तुति का आनंद लिया।

इस दौरान उन्होंने अपने संदेश में कहा कि आश्रम का अर्थ होता है निराश्रित को आश्रय देना। विश्व कल्याण आश्रम और आध्यात्मिक उत्थान मंडल की स्थापना इसी उद्देश्य से की गई है। उन्होंने आश्रम के संस्थापक ब्रह्मलीन जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य प्यासे को पानी, भूखे को भोजन और पीड़ित को चिकित्सा उपलब्ध कराना था, और यही सेवा कार्य आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि जहां जिस वस्तु का अभाव है, वहां उसकी पूर्ति करना ही सच्चा धर्म है।

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