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NATO क्या है? जानें कौन-कौन से देश नाटो में हैं शामिल

by Rakesh Pandey
NATO क्या है
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सेंट्रल डेस्क। NATO : आखिर ये नाटो क्या होता है। पिछले कुछ समय से नाटो की इतनी चर्चा क्यों हो रही है। नाटो के कारण ही रूस ने यूक्रेन पर हमला किया है ताकि यूक्रेन को नाटो का सदस्य ना बनने दिया जाये। जबकि यूक्रेन की कोशिश थी कि वह नाटो का सदस्य बने ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आखिर यह नाटो क्या है इसके उद्देश्य क्या है और दुनिया के कौन कौन से देश नाटो में शामिल हैं। भारत नाटो का सदस्य क्यों नहीं है।

NATO क्या है ? 1949 में स्थापना, 30 देश हैं सदस्य

North Atlantic Treaty Organization (NATO): उत्तर अटालांटिक संधि संगठन उत्तरी अमेरिका और यूरोपीय देशों का एक सैन्य संगठन है। इसकी स्थापना 1949 में हुई थी। नाटो का उद्देश्य राजनीतिक और सैन्य माध्यमों से अपने सदस्यों की स्वतंत्रता और सुरक्षा की गारंटी देना है। सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद बने इस संगठन का उस समय मुख्य उद्देश्य सोवियत संघ के बढ़ते दायरे को सीमित करना था। नाटो जब बना तो अमेरिका, ब्रिटेन, बेल्जियम, कनाडा, डेनमार्क, फ्रांस, आइसलैंड, इटली, लक्जमबर्ग, नीदरलैंड्स, नॉर्वे और पुर्तगाल इसके 12 संस्थापक सदस्य थे। वर्तमान में इसके सदस्यों की संख्या 30 है। नॉर्थ मैसेडोनिया साल 2020 में इसमें शामिल होने वाले सबसे नया मेंबर है।

कोई भी यूरोपीय देश बन सकता था सदस्य
नाटो के गठन के समय जो समझौता हुआ था उसके तहत इसमें शामिल होने वाले सभी यूरोपीय देशों के लिए खुले दरवाजे की नीति अपनाई गई थी। इसके तहत इसमें कोई भी यूरोपीय देश शामिल हो सकता था। इसके साथ ही इसमें सदस्य देशों के लिए एक सुरक्षा का प्रावधान भी था। इसमें साझा सुरक्षा को लेकर एक घोषणा पत्र में अुनच्छेद भी है।

इसके तहत इसके तहत कहा गया है कि यदि कोई बाहरी देश इसके सदस्य देशों पर हमला करता है तो फिर सभी सदस्य देश मिलकर उसकी रक्षा करेंगे। चूंकि, यूक्रेन नाटो का सदस्य नहीं है ऐसे में नाटो के देश सीधे तौर पर उसकी मदद के लिए आगे नहीं आ सकते हैं। हालांकि, अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा सीधे तौर पर यूक्रेन की मदद कर रहे हैं।

NATO का सदस्य कौन बन सकता है?
नाटो का सदस्य बनने के लिए यूरोपीय देश होना जरूरी शर्त है। हालांकि, अपनी पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से नाटो ने कई अन्य देशों से भी अपने संपर्क स्थापित किए हैं। अल्जीरिया, मिस्र, जॉर्डन, मोरक्को और ट्यूनिशिया भी नाटो के सहयोगी हैं। अफगानिस्तान और पाकिस्तान में भी नाटो की भूमिका रही है। रूस और यूक्रेन विवाद में जिस संगठन की चार्चा सबसे अधिक हो रही है वह संगठन है नाटो।

इसकी भूमिका की चर्चा हो रही है और कहा जा रहा है कि नाटो अपने कर्तव्यों से भाग रहा है। अधिकांश यूरोपीय यह मानते हैं कि नाटो ने रूस को यूक्रेन पर आक्रमण करने से रोकने के लिए पर्याप्त कार्य नहीं किया। यूरोपीय लोग इस बात के लिए कम निश्चित हैं कि यूक्रेन नाटो की सदस्यता को अपनाएगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह नाटो है क्या और यह कार्य कैसे करता है। आइए जानते हैं इस लेख के माध्यम से।

रूस और यूक्रेन विवाद से चर्चा में आया नाटो का नाम
रूस और यूक्रेन विवाद में जिस संगठन की चार्चा सबसे अधिक हो रही है वह संगठन है नाटो नाटो। इसकी भूमिका की चर्चा हो रही है और कहा जा रहा है कि नाटो अपने कर्तव्यों से भाग रहा है। अधिकांश यूरोपीय यह मानते हैं कि नाटो ने रूस को यूक्रेन पर आक्रमण करने से रोकने के लिए पर्याप्त कार्य नहीं किया। यूरोपीय लोग इस बात के लिए कम निश्चित हैं कि यूक्रेन NATO की सदस्यता को अपनाएगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह नाटो है क्या और यह कार्य कैसे करता है। आइए जानते हैं इस लेख के माध्यम से।

बेल्जियम में है मुख्यालय
नाटो एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जो 1949 में 28 यूरोपीय देशों और 2 उत्तरी अमेरिकी देशों के बीच बनाया गया है। नाटो का उद्देश्य राजनीतिक और सैन्य साधनों के माध्यम से अपने सदस्य देशों को स्वतंत्रता और सुरक्षा की गारंटी देना है और रक्षा और सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर सहयोग के माध्यम से देशों के बीच संघर्ष को रोकना है। इसे दूसरे विश्व युद्ध के बाद बनाया गया था। नाटो का हेडक्वार्टर ब्रुसेल्स, बेल्जियम में स्थित है।

केवल सदस्य देश ही संरक्षण का ले सकते हैं लाभ
नाटो कहता है कि नाटो के किसी भी एक देश पर आक्रमण पूरे संगठन पर आक्रमण होगा। यानी किसी के एक देश पर आक्रमण का जवाब नाटो के सभी देश देंगे। नाटो की अपनी कोई सेना या अन्य कोई रक्षा सूत्र नहीं है बल्कि नाटो के सभी सदस्य देश म्युचल अंडरस्टेंडिंग के आधार पर अपनी-अपनी सेनाओं के साथ योगदान देंगे। ये ध्यान रखने योग्य बात है कि केवल नाटो के सदस्य देश ही उसके संरक्षण का लाभ ले सकते हैं। अन्य देश जो नाटो के सदस्य नहीं हैं उनके प्रति नाटो की कोई जवाबदेही नहीं होगी। इसे साथ ही अन्य विशेष बात ये भी है कि नाटो अपने सदस्य देशों पर किसी भी बाहरी आक्रमण से बचाव के प्रति जवाबदेह है लेकिन यदि किसी सदस्य देश में सिविल या कोई अन्य वॉर होता है तो नाटो की उसमें शून्य भागीदारी होगी।

फिनलैंड और स्वीडन ने 2022 में शामिल होने की जताई थी इच्छा

फिनलैंड और स्वीडन ने 2022 में नाटो में शामिल होने के लिए आवेदन जमा किए थे। तुर्किये और हंगरी को छोड़कर नाटो के अधिकांश सदस्यों ने इन दो नॉर्डिक देशों के आवेदनों का स्वागत किया था। तुर्किये के राष्ट्रपति अर्दोआन ने फिनलैंड और स्वीडन पर कुर्द ‘आतंकवादी संगठनों’ को रखने का आरोप लगाया था।

सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान ने कहा कि फिनलैंड और स्वीडन उनके देश के कानून के शासन के रिकॉर्ड के बारे में ‘स्पष्ट झूठ’ फैला रहे हैं। बता दें कि स्वीडन और फिनलैंड ने साल 2022 में नाटो का सदस्य बनने के लिए आवेदन किया था। इसके बाद अधिकतर देशों ने स्वीडन और फिनलैंड को नाटो का सदस्य बनाने की मंजूरी दे दी थी लेकिन हंगरी और तुर्किए इसके लिए तैयार नहीं थे।

तुर्किए का आरोप था कि कुर्दिश आतंकी संगठन फिनलैंड और स्वीडन में अपना बेस बनाए हुए हैं और वहां से तुर्किए के खिलाफ साजिश रच रहे हैं। हालांकि दोनों देशों ने तुर्किए के आरोपों से इनकार किया था।

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