धर्म-कर्म डेस्क : इंदिरा एकादशी व्रत का नाम आपने सुना होगा। इस व्रत का एक खास महत्व होता है। हर साल पितृपक्ष की एकादशी तिथि को यह व्रत किया जाता है। इस साल इंदिरा एकादशी व्रत नौ अक्टूबर को है। दोपहर 12 बजकर 36 मिनट से यह व्रत प्रारंभ होगा और 10 अक्टूबर को दोपहर 3 बजकर 8 मिनट पर समाप्त हो जाएगा। इस व्रत में उदया तिथि की मान्यता है इसलिए एकादशी का व्रत 10 अक्टूबर के दिन रखा जाएगा। वहीं, 11 अक्टूबर को पारण होगा। पारण का मुहूर्त सुबह 06:19 बजे से 08:38 बजे तक है। व्रतियों को इस दो घंटों में पारण कर लेना चाहिए। ऐसे में आप भी इस व्रत को कर सकते हैं लेकिन इसे करने से पूर्व इसके महत्व को जान लेना जरूरी है। इसके लिए बेहतर होगा कि आप अपने पुरोहित से मिलकर पूरी जानकारी हासिल कर लें।

इंदिरा एकादशी का महत्य?
इंदिरा एकादशी करने से पूर्व इसके महत्व के बारे में जान लेना जरूरी है। चूंकि, इस व्रत को करते समय काफी सावधानी बरतने की जरूरत होती है। पुरोहित विनय शंकर कहते हैं कि अश्विन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को इंदिरा एकादशी के नाम से जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि पितृ पक्ष में इंदिरा एकादशी व्रत रखने से पितरों को स्वर्ग की प्राप्ति होती है। साथ ही जीवन में सुख-सुमृद्धि और मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति भी होती है। इसलिए इंदिरा एकादशी व्रत का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।
एकादशी का व्रत कब से शुरू करना शुभ?
पंडित विनय शंकर कहते हैं कि इंदिरा एकादशी का व्रत काफी विधि विधान के साथ किया जाता है। एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर और स्नानादि से निवृत होकर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान विष्णु का पंचोपचार विधि से पूजन करें। निर्जला व्रत रखकर विष्णु पुराण का श्रवण करें या पाठ करें। इस दिन रात्रि में भजन-कीर्तन करते हुए रात्रि जागरण करना चाहिए।
निर्जला एकादशी के नियम क्या है?
निर्जला एकादशी का व्रत एक कठिन व्रत माना जाता है। पंडित विनय शंकर कहते हैं कि उपवास के कठोर नियमों के कारण कुछ बातों पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत होती है। इसमें अन्न के साथ जल का त्याग भी करना होता है। ऐसे में द्वादशी तिथि पर सबसे पहले स्नान के बाद विष्णु जी की पूजा विधि-विधान से करें। ब्राह्मणों को भोजन कराएं। दान-दक्षिणा दें और फिर जल ग्रहण कर व्रत खोलें। इसमें किसी तरह के संदेह होने पर अपने पंडित या पुरोहित से सलाह अवश्य लें।
हिंदू धर्म में इस व्रत का काफी अधिक महत्व
हिंदू धर्म में इस व्रत का काफी अधिक महत्व है। अब अधिकांश लोग इस व्रत को करने लगे हैं। पंडित विनय शंकर कहते हैं कि पहले इस व्रत के बारे में कम लोगों को ही जानते थे लेकिन अब अधिक से अधिक लोग इसके महत्व को समझने लगे हैं। पितृ पक्ष के दौरान पड़ने वाली इंदिरा एकादशी को पितरों के उद्धार के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
कैसे करें व्रत?
पंडित विनय शंकर कहते हैं कि इंदिरा एकादशी में भगवान शालिग्राम की पूजा की जाती है। शालिग्राम भगवान विष्णु का एक रूप है। शालिग्राम के उपयोग से घर के सभी वास्तु दोष दूर हो जाते हैं। शालिग्राम करीब 33 प्रकार के हैं। इनमें 24 प्रकार के शालिग्राम को भगवान विष्णु के 24 अवतारों से संबंधित माना जाता है। इस व्रत के धार्मिक कर्म दशमी से ही शुरू हो जाते हैं।
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दशमी के दिन नदी में तर्पण कराएं
दशमी के दिन नदी में तर्पण आदि कर ब्राह्मण भोज कराएं और उसके बाद स्वयं भी भोजन ग्रहण करें। दशमी पर सूर्यास्त के बाद भोजन न करें। एकादशी के दिन प्रात:काल उठकर व्रत का संकल्प लें और भगवान विष्णु का पूजन करने के बाद दोपहर में पुन: श्राद्ध-तर्पण कर ब्राह्मणों को भोजन कराएं।

