नई दिल्ली, सेंट्रल डेस्क : लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के दौरान अचानक गीता मुखर्जी का नाम सामने आ गया। दरअसल, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने चर्चा के दौरान गीता मुखर्जी का नाम याद दिलाया। बता दें की सोनिया गांधी के भाषण के ठीक बाद जब निशिकांत दुबे ने महिला आरक्षण बिल पर चर्चा की, तो उन्होंने सोनिया पर कटाक्ष किया कि वे इस बिल का श्रेय लेना चाहती हैं, लेकिन वे गीता मुखर्जी और सुषमा स्वराज का जिक्र करना भूल गईं।
एक महान राजनीतिक और समाजसेवी
इस चर्चा ने लोगों के मन में यह सवाल उत्पन्न कर दिया कि कौन हैं गीता मुखर्जी और उनका योगदान क्या है? तो चलिए जानते हैं, गीता मुखर्जी का परिचय और उनके योगदान के बारे में…। दरअसल, गीता मुखर्जी भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण व्यक्तित्व का नाम है। उन्होंने अपने जीवन के दौरान समाजसेवा और राजनीतिक कार्य में अपना सबसे अच्छा दिया।
1996 में की थी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की मांग
बंगाल के तत्कालीन अविभाजित मेदिनीपुर जिले के पांशकूड़ा निर्वाचन क्षेत्र (अब परिसीमन के कारण अस्तित्वहीन) से सात बार भाकपा की लोकसभा सदस्य रहीं गीता मुखर्जी पहली सांसद थीं जिन्होंने सितंबर 1996 में संसदीय और विधायी सीटों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की मांग करते हुए संसद के पटल पर एक निजी सदस्य का विधेयक पेश किया था।
ऐसे में बंगाल की इस मृदुभाषी महिला की कहानी फिर से चर्चा में है। गीता मुखर्जी भारतीय समाज के लिए महिला सशक्तिकरण और सामाजिक समानता की दिशा में महत्वपूर्ण थीं।
गीता मुखर्जी का संक्षिप्त परिचय:
– 23 मई, 1926 को पूर्णिया, बिहार में जन्म हुआ था
– कांग्रेस पार्टी के रूप में शामिल होकर राजनीति की और विभागीय मंत्री के रूप में भी कार्य किया।
– सांसद के रूप में भी कई बार सेवा की और देश के विकास के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया।
– गीता मुखर्जी ने महिला और बच्चों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, और समाज कल्याण के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स की शुरुआत की।
महिलाओं को अधिक भागीदारी की रहीं पैरोकार
गीता मुखर्जी का महत्वपूर्ण योगदान विभागीय मंत्री के रूप में रहा। उन्होंने महिलाओं के लिए समाज में अधिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए अहम कदम उठाए और विभिन्न सामाजिक और शैक्षिक योजनाओं की शुरुआत की। उनके योगदान को सम्मान देना चाहिए और उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को याद दिलाने का यह प्रयास गीता मुखर्जी के योगदान को सलामी देता है।
क्या था सांसद निशिकांत दुबे का बयान
सांसद निशिकांत दुबे का बयान गीता मुखर्जी के योगदान के प्रति विवादित था। वे सोनिया गांधी के भाषण के बाद इस मुद्दे को उठाने का प्रयास कर रहे थे, जिसमें उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी ने महिला आरक्षण बिल का श्रेय लेने की कोशिश की है, लेकिन वे गीता मुखर्जी और सुषमा स्वराज का जिक्र करना भूल गईं। यह बयान तब सामने आया जब महिला आरक्षण बिल पर चर्चा हो रही थी। इसके बाद से गीता मुखर्जी के योगदान की ओर फिर से सामूहिक ध्यान गया।

