चाईबासा : टाटा स्टील की विजय-टू लौह अयस्क खदान में झारखंड मजदूर यूनियन के बैनर तले सैकड़ों मजदूरों ने आर्थिक नाकेबंदी शुरू कर दी है। 14 सूत्री मांगों को सोमवार सुबह 5 बजे से उत्पादन व माल ढुलाई कार्य अनिश्चितकाल के लिए ठप कर दिया है। आंदोलन में शामिल मजदूरों ने खदान के सुरक्षा गार्डो तथा आवश्यक सेवा जैसे एंबुलेंस, भोजन, पानी, डीजी चलाने के लिए डीजल आदि को मुक्त रखा है। इस दौरान टाटा स्टील या इनके अधीन कार्यरत तमाम वेंडरों के एक भी अधिकारी व कर्मचारी को खदान के अंदर जाने नहीं दिया गया।
प्रथम पाली के बाद द्वितीय एवं रात्रि पाली में भी यहीं स्थिति रहने वाली है। इस खदान से लौह अयस्क का एक टुकड़ा उत्पादन व ढुलाई सोमवार को नहीं हो पाया है। इधर आंदोलन की खबर मिलते ही किरीबुरु के थाना प्रभारी बमबम कुमार, गुवा थाना प्रभारी नीतीश कुमार के अलावा भारी संख्या में पुलिस बल घटनास्थल पहुंचकर विधि-व्यवस्था पर नजर रख रहे हैं।
इस संबंध में यूनियन के अध्यक्ष दीनबंधु पात्रो ने बताया की टाटा स्टील प्रबंधन उनकी 14 सूत्री मांगों को पूरा नहीं कर रहा है। पिछले दो साल से हम अपनी मांगों को लेकर कंपनी प्रबंधन से आग्रह करते आ रहे हैं। सोमवार सुबह 5 बजे से हम आर्थिक नाकेबंदी कर रहे हैं, लेकिन शाम तीन बजे तक कंपनी का कोई भी पदाधिकारी हमसे एक परिवार का सदस्य के नाते भी हमारी सुध लेने नहीं आया। कंपनी हमारे धैर्य की परीक्षा नहीं ले, क्योंकि हम सभी महीनों तक यहां 24 घंटे आंदोलन करने को तैयार हैं। जब तक हमारी मांगें नहीं मानी जाती हैं, तब तक हम यहां से हटने वाले नहीं हैं। तीनों पाली का उत्पादन व माल ढुलाई सौ फीसद बंद है। टाटा स्टील की विजय-टू खदान में प्रतिदिन लगभग 6 हजार टन लौह अयस्क का उत्पादन व लगभग 4 हजार टन लौह अयस्क की ढुलाई की जाती है। जैसे-जैसे आंदोलन आगे बढ़ेगा, वैसे वैसे कंपनी के नुकसान का ग्राफ भी बढ़ता जाएगा।।
ये हैं मांगें
झारखंड मजदूर यूनियन ने जो मांगें प्रबंधन के पास रखी हैं, उसमें 100 स्थानीय ग्रामीण बेरोजगार युवाओं को स्थायी रोजगार देना, लंबे समय से कार्यरत स्थानीय मजदूरों का स्थायीकरण करना, मजदूरों को मेडिकल जांच में अनफिट पाए जाने पर कंपनी-वेंडर द्वारा इलाज कराके दोबारा काम पर रखना, कंपनी एवं ठेकेदार के अधीन कार्यरत मजदूरों को ईएसआई चिकित्सा सुविधा का लाभ देना, सभी ठेका मजदूरों को योग्यतानुसार वेतन देना, सभी ठेका मजदूरों को 20 प्रतिशत बोनस एवं डस्ट एलाउएंस एक समान मिलना चाहिए, मजदूर की मृत्यु हो जाने पर उसके बेटा या पत्नी को नौकरी देना, कार्यस्थल पर दुर्घटना होने पर मेडिकल सुविधा एवं वेतन भुगतान जारी रखना, मजदूर की मृत्यु या सेवानिवृत्त होने पर उन्हें उचित राशि देना, ठेका मजदूरों को नियुक्ति पत्र देना, कंपनी और ठेका मजदूरों के लिए कैंटीन की सुविधा, जब भी ठेकेदार बदली होता है तो 45 से 90 दिन के अंदर फुल व फाइनल राशि का भुगतान होना, 5 साल काम करने पर ग्रेच्युटी मिलना, यदि मजदूर अपने कार्यकाल में गंभीर बीमारी से ग्रस्त होता है तो उसके घरवालों को नौकरी देना आदि शामिल हैं।
भोजन-पानी लेकर डटे मजदूर
आंदोलन स्थल पर ही मजदूर खाना बना व खा रहे हैं। रात में तंबू लगाकर जंगल के बीच आंदोलन स्थल पर ही सोएंगे। आपस में चंदा कर सारे मजदूर खाद्य सामग्री खरीदे हुए हैं। पानी टैंकर व अन्य व्यवस्था पहले से करके रखा हुआ है। इस मौके पर यूनियन के कोल्हान प्रमंडल उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद मोहंती, जिलाध्यक्ष आशीष कुदादा, उपाध्यक्ष करनेश जेराई, महासचिव राजेंद्र चांपिया, बराईबुरु इकाई के अध्यक्ष दीनबंधु पात्रो, महासचिव दुलाल चांपिया, उपाध्यक्ष परमेश्वर बुरमा, पूर्व जिप सदस्य बामिया माझी, मधु सिधु, लखन चांपिया, बागी चांपिया, सुखराम सिधु, सादो देवगम, कमल बुरमा, मेघाहातुबुरु इकाई के महासचिव शांतिएल भेंगरा, सचिव बिनोद होनहागा आदि के अलावा गुवा व किरीबुरु इकाई के पदाधिकारी तथा सारंडा के विभिन्न गांवों के सैकड़ों ग्रामीण व महिलाएं पारंपरिक हथियारों से लैस हैं।
आरक्षण खत्म करने की साजिश के तहत बीजेपी की संविधान बदलने की कोशिश को 2024 के आम चुनाव में जनता ने नाकाम कर दिया था और बैसाखी सरकार बना कर लोकतांत्रिक मूल्यों का पाठ पढ़ाया था । लेकिन बीजेपी ये खीज अब संविधान निर्माता पर निकाल रही है और बाबा साहेब का अपमान किया गया है । लेकिन दुख की बात ये है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमित शाह को सीख देने के बजाय आरोप- प्रत्यारोप की राजनीति तेज कर दी ।
कांग्रेस समेत प्रतिपक्ष ने पीएम मोदी से अमित शाह के इस्तीफे की मांग की है. लेकिन मोदी सरकार डॉ. अंबेडकर के अपमान को अपराध मानने को तैयार नहीं है , उल्टे बीजेपी ने संसद की कार्रवाई ठप्प रखी यही नहीं अपनी मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस सांसदों के साथ धक्कामुक्की की गई पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को गिरा दिया गया. बीजेपी ने षड़यंत्र के तहत नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ संगीन धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करा दी गई । आगे डॉ.बलमुचू ने कहा कि बीजेपी और उसकी मातृसंस्था हमेशा से डॉ.अंबेडकर और संविधान विरोधी रही है । इन्होंने न सिर्फ संविधान के निर्माण के समय से ही विरोध किया, बल्कि इससे पहले डॉ. अंबेडकर को चुनाव हरवाया था । कांग्रेस डॉ.अंबेडकर के अपमान को लेकर अमित शाह के इस्तीफे की मांग पर अटल है , जब तक अमित शाह इस्तीफा नहीं देंगे, हम विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे ।
टाटा स्टील के खदान में मजदूरों ने शुरू की आर्थिक नाकेबंदी
चाईबासा : टाटा स्टील की विजय-टू लौह अयस्क खदान में झारखंड मजदूर यूनियन के बैनर तले सैकड़ों मजदूरों ने आर्थिक नाकेबंदी शुरू कर दी है। 14 सूत्री मांगों को सोमवार सुबह 5 बजे से उत्पादन व माल ढुलाई कार्य अनिश्चितकाल के लिए ठप कर दिया है। आंदोलन में शामिल मजदूरों ने खदान के सुरक्षा गार्डो तथा आवश्यक सेवा जैसे एंबुलेंस, भोजन, पानी, डीजी चलाने के लिए डीजल आदि को मुक्त रखा है। इस दौरान टाटा स्टील या इनके अधीन कार्यरत तमाम वेंडरों के एक भी अधिकारी व कर्मचारी को खदान के अंदर जाने नहीं दिया गया।
प्रथम पाली के बाद द्वितीय एवं रात्रि पाली में भी यहीं स्थिति रहने वाली है। इस खदान से लौह अयस्क का एक टुकड़ा उत्पादन व ढुलाई सोमवार को नहीं हो पाया है। इधर आंदोलन की खबर मिलते ही किरीबुरु के थाना प्रभारी बमबम कुमार, गुवा थाना प्रभारी नीतीश कुमार के अलावा भारी संख्या में पुलिस बल घटनास्थल पहुंचकर विधि-व्यवस्था पर नजर रख रहे हैं।
इस संबंध में यूनियन के अध्यक्ष दीनबंधु पात्रो ने बताया की टाटा स्टील प्रबंधन उनकी 14 सूत्री मांगों को पूरा नहीं कर रहा है। पिछले दो साल से हम अपनी मांगों को लेकर कंपनी प्रबंधन से आग्रह करते आ रहे हैं। सोमवार सुबह 5 बजे से हम आर्थिक नाकेबंदी कर रहे हैं, लेकिन शाम तीन बजे तक कंपनी का कोई भी पदाधिकारी हमसे एक परिवार का सदस्य के नाते भी हमारी सुध लेने नहीं आया। कंपनी हमारे धैर्य की परीक्षा नहीं ले, क्योंकि हम सभी महीनों तक यहां 24 घंटे आंदोलन करने को तैयार हैं। जब तक हमारी मांगें नहीं मानी जाती हैं, तब तक हम यहां से हटने वाले नहीं हैं। तीनों पाली का उत्पादन व माल ढुलाई सौ फीसद बंद है। टाटा स्टील की विजय-टू खदान में प्रतिदिन लगभग 6 हजार टन लौह अयस्क का उत्पादन व लगभग 4 हजार टन लौह अयस्क की ढुलाई की जाती है। जैसे-जैसे आंदोलन आगे बढ़ेगा, वैसे वैसे कंपनी के नुकसान का ग्राफ भी बढ़ता जाएगा।।
ये हैं मांगें
झारखंड मजदूर यूनियन ने जो मांगें प्रबंधन के पास रखी हैं, उसमें 100 स्थानीय ग्रामीण बेरोजगार युवाओं को स्थायी रोजगार देना, लंबे समय से कार्यरत स्थानीय मजदूरों का स्थायीकरण करना, मजदूरों को मेडिकल जांच में अनफिट पाए जाने पर कंपनी-वेंडर द्वारा इलाज कराके दोबारा काम पर रखना, कंपनी एवं ठेकेदार के अधीन कार्यरत मजदूरों को ईएसआई चिकित्सा सुविधा का लाभ देना, सभी ठेका मजदूरों को योग्यतानुसार वेतन देना, सभी ठेका मजदूरों को 20 प्रतिशत बोनस एवं डस्ट एलाउएंस एक समान मिलना चाहिए, मजदूर की मृत्यु हो जाने पर उसके बेटा या पत्नी को नौकरी देना, कार्यस्थल पर दुर्घटना होने पर मेडिकल सुविधा एवं वेतन भुगतान जारी रखना, मजदूर की मृत्यु या सेवानिवृत्त होने पर उन्हें उचित राशि देना, ठेका मजदूरों को नियुक्ति पत्र देना, कंपनी और ठेका मजदूरों के लिए कैंटीन की सुविधा, जब भी ठेकेदार बदली होता है तो 45 से 90 दिन के अंदर फुल व फाइनल राशि का भुगतान होना, 5 साल काम करने पर ग्रेच्युटी मिलना, यदि मजदूर अपने कार्यकाल में गंभीर बीमारी से ग्रस्त होता है तो उसके घरवालों को नौकरी देना आदि शामिल हैं।
भोजन-पानी लेकर डटे मजदूर
आंदोलन स्थल पर ही मजदूर खाना बना व खा रहे हैं। रात में तंबू लगाकर जंगल के बीच आंदोलन स्थल पर ही सोएंगे। आपस में चंदा कर सारे मजदूर खाद्य सामग्री खरीदे हुए हैं। पानी टैंकर व अन्य व्यवस्था पहले से करके रखा हुआ है। इस मौके पर यूनियन के कोल्हान प्रमंडल उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद मोहंती, जिलाध्यक्ष आशीष कुदादा, उपाध्यक्ष करनेश जेराई, महासचिव राजेंद्र चांपिया, बराईबुरु इकाई के अध्यक्ष दीनबंधु पात्रो, महासचिव दुलाल चांपिया, उपाध्यक्ष परमेश्वर बुरमा, पूर्व जिप सदस्य बामिया माझी, मधु सिधु, लखन चांपिया, बागी चांपिया, सुखराम सिधु, सादो देवगम, कमल बुरमा, मेघाहातुबुरु इकाई के महासचिव शांतिएल भेंगरा, सचिव बिनोद होनहागा आदि के अलावा गुवा व किरीबुरु इकाई के पदाधिकारी तथा सारंडा के विभिन्न गांवों के सैकड़ों ग्रामीण व महिलाएं पारंपरिक हथियारों से लैस हैं।
आरक्षण खत्म करने की साजिश के तहत बीजेपी की संविधान बदलने की कोशिश को 2024 के आम चुनाव में जनता ने नाकाम कर दिया था और बैसाखी सरकार बना कर लोकतांत्रिक मूल्यों का पाठ पढ़ाया था । लेकिन बीजेपी ये खीज अब संविधान निर्माता पर निकाल रही है और बाबा साहेब का अपमान किया गया है । लेकिन दुख की बात ये है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमित शाह को सीख देने के बजाय आरोप- प्रत्यारोप की राजनीति तेज कर दी ।
कांग्रेस समेत प्रतिपक्ष ने पीएम मोदी से अमित शाह के इस्तीफे की मांग की है. लेकिन मोदी सरकार डॉ. अंबेडकर के अपमान को अपराध मानने को तैयार नहीं है , उल्टे बीजेपी ने संसद की कार्रवाई ठप्प रखी यही नहीं अपनी मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस सांसदों के साथ धक्कामुक्की की गई पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को गिरा दिया गया. बीजेपी ने षड़यंत्र के तहत नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ संगीन धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करा दी गई । आगे डॉ.बलमुचू ने कहा कि बीजेपी और उसकी मातृसंस्था हमेशा से डॉ.अंबेडकर और संविधान विरोधी रही है । इन्होंने न सिर्फ संविधान के निर्माण के समय से ही विरोध किया, बल्कि इससे पहले डॉ. अंबेडकर को चुनाव हरवाया था । कांग्रेस डॉ.अंबेडकर के अपमान को लेकर अमित शाह के इस्तीफे की मांग पर अटल है , जब तक अमित शाह इस्तीफा नहीं देंगे, हम विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे ।

