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TEACHERS TRANSFER IN BIHAR : 185 शिक्षकों का हुआ स्थानांतरण, जानें शिक्षा विभाग का अगला कदम

शिक्षकों के स्थानांतरण के इस पूरे प्रकरण में अब तक 759 आवेदन विचाराधीन थे, जिनमें से 260 आवेदन बीपीएससी द्वारा चयनित थे। विभाग ने 44 आवेदन अमान्य व 30 आवेदन विचाराधीन रखे गए।

by Rakesh Pandey
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पटना: बिहार में शिक्षक स्थानांतरण को लेकर लंबे समय से चल रही चर्चाओं के बीच, शिक्षा विभाग ने आखिरकार 185 शिक्षकों के स्थानांतरण की दूसरी सूची जारी कर दी है। इस निर्णय का शिक्षकों द्वारा बेसब्री से इंतजार किया जा रहा था और अब यह साफ हो गया है कि 260 शिक्षकों के ट्रांसफर के आवेदन पर विचार किया गया, जिनमें से 185 आवेदन स्वीकृत किए गए हैं। यह कदम खासकर बीपीएससी (Bihar Public Service Commission) द्वारा चयनित TRE 1 और 2 के शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्हें अब अपने नए स्थानों पर पोस्टिंग मिल सकेगी।

कब हुआ यह फैसला और क्या है इसके पीछे की वजह?

इस स्थानांतरण सूची का ऐलान सोमवार को शिक्षा विभाग के सचिव बैद्यनाथ यादव की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में किया गया। विभाग ने पहले चरण में 47 शिक्षकों के स्थानांतरण को मंजूरी दी थी और अब 260 आवेदन पर विचार के बाद 185 शिक्षकों के स्थानांतरण को स्वीकृति मिल गई है। इस प्रक्रिया के तहत 1.90 लाख शिक्षकों ने अपने स्थानांतरण के लिए आवेदन किया था, जिनमें से विभिन्न श्रेणियों के तहत आवेदन आए थे।

नियोजित शिक्षकों का सौतेला व्यवहार?

इस बीच, स्नातक शिक्षक संघ ने शिक्षा विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रदेश अध्यक्ष पिंटू कुमार सिंह का कहना है कि विभाग नियोजित शिक्षकों के साथ सौतेला व्यवहार कर रहा है। उन्होंने बताया कि सक्षमता परीक्षा पास करने के बाद नियोजित शिक्षकों को विशिष्ट शिक्षक का दर्जा मिला था, लेकिन इसके बावजूद विभाग ने उन्हें सही तरीके से सम्मानित नहीं किया।

पिंटू कुमार सिंह ने कहा, “नियोजित शिक्षक, जिन्होंने सक्षमता परीक्षा पास कर विशिष्ट शिक्षक का दर्जा प्राप्त किया, उन्हें अभी तक उन जिलों में पोस्टिंग नहीं मिली है, जिनके लिए उन्होंने अपनी मेधा के आधार पर क्वालीफाई किया था। वे जहां हैं, वहीं अटके हुए हैं।” यह स्थिति तब उत्पन्न हुई जब मेधा के आधार पर नियोजित शिक्षकों को आवंटित जिलों में पोस्टिंग का वादा किया गया था, लेकिन वे अब भी उसी स्थान पर कार्यरत हैं, जहां पहले थे।

इस स्थानांतरण प्रक्रिया का महत्व और आगे क्या होगा?

शिक्षकों के स्थानांतरण के इस पूरे प्रकरण में अब तक 759 आवेदन विचाराधीन थे, जिनमें से 260 आवेदन बीपीएससी द्वारा चयनित थे। इसके अलावा, विभाग ने 44 आवेदन को अमान्य कर दिया, जबकि 30 आवेदन विचाराधीन रखे गए। इस प्रक्रिया में यह साफ हुआ कि कुछ शिक्षक अपनी जगह बदलने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जबकि कुछ अन्य मामले में प्रक्रियाओं में देरी या कुछ तकनीकी कारणों से निर्णय लिया जाना बाकी है।

इस स्थिति से एक बात तो साफ है कि बिहार के शिक्षक समुदाय में स्थानांतरण को लेकर असंतोष का माहौल है। हालांकि, शिक्षा विभाग ने अपने फैसले से कुछ शिक्षकों को राहत जरूर दी है, लेकिन पूरी प्रक्रिया के बाद भी सवाल उठते हैं कि विभाग किस तरह से उन शिक्षकों की समस्याओं का समाधान करेगा, जिन्हें अब तक उपेक्षित महसूस हो रहा है।

भविष्य में उम्मीदें?

अब जबकि 185 शिक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी हो गई है, यह सवाल बना हुआ है कि क्या विभाग आगे आने वाले समय में अन्य शिक्षकों के लिए भी शीघ्र फैसला लेगा। विशेष रूप से, जो नियोजित शिक्षक अपनी सक्षमता परीक्षा पास कर विशिष्ट शिक्षक के रूप में स्थानांतरित होने के लिए इंतजार कर रहे हैं।

आखिरकार, यह एक बड़ा मुद्दा है जो न केवल शिक्षकों के लिए, बल्कि बिहार के शिक्षा क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि विभाग अगले कुछ महीनों में अपनी नीतियों में सुधार करेगा और नियोजित शिक्षकों के लिए उचित स्थानांतरण और कार्यविभाजन सुनिश्चित करेगा, ताकि वे भी एक समान अवसरों का लाभ उठा सकें।

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