आगरा: आगरा स्वास्थ्य विभाग में जननी सुरक्षा योजना और महिला नसबंदी प्रोत्साहन योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। आगरा के फतेहाबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत संचालित जननी सुरक्षा योजना और महिला नसबंदी प्रोत्साहन योजना में चौंकाने वाला घोटाला सामने आया है। एक महिला को रिकॉर्ड में 25 बार प्रसव और 5 बार नसबंदी कराने वाली दर्शाया गया, जिसके बदले में उसे ₹45,000 की सरकारी राशि सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर की गई।
जननी सुरक्षा योजना और नसबंदी योजना में फर्जीवाड़े का खुलासा
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसव पर ₹1,400 और शहरी क्षेत्रों में ₹1,000 की राशि महिला को दी जाती है। वहीं, महिला नसबंदी कराने पर ₹2,000 की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। यह सारी धनराशि लाभार्थी के बैंक खाते में सीधे स्थानांतरित की जाती है।
फतेहाबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के वित्तीय ऑडिट के दौरान यह घोटाला उजागर हुआ। ऑडिट में पाया गया कि एक ही महिला को 25 बार प्रसव और पांच बार नसबंदी कराने वाली दिखाकर सरकारी योजनाओं से ₹45,000 की राशि प्राप्त की गई।
अधिकारियों की संलिप्तता की आशंका, जांच समिति गठित
इस घोटाले के उजागर होने के बाद आगरा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने कहा, “हमने इस मामले की जांच के लिए एक विशेष टीम का गठन किया है। यह देखा जा रहा है कि यह कोई तकनीकी त्रुटि है या जानबूझकर की गई गड़बड़ी। जांच के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
फतेहाबाद सीएचसी के अधीक्षक की भूमिका भी जांच के घेरे में है। स्वास्थ्य विभाग ने पूरे जिले में फैले अन्य स्वास्थ्य संस्थानों जैसे लेडी लायल महिला अस्पताल और एसएस मेडिकल कॉलेज की जांच भी शुरू कर दी है। इन संस्थानों में कुल ₹38.95 लाख की संदिग्ध भुगतान राशि सामने आई है।
आगरा में पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
यह पहला मौका नहीं है जब आगरा के स्वास्थ्य विभाग में इस प्रकार की अनियमितताएं सामने आई हों। पूर्व में भी एक 60 वर्षीय महिला को दस महीनों में पांच बार प्रसव कराने वाली दर्शाया गया था। इसी तरह, एक अन्य महिला को चार महीनों में तीन बार गर्भवती बताया गया था। इससे पहले, कई अवैध गर्भपात केंद्र भी सील किए गए थे, जिन्हें अपात्र लोग चला रहे थे।
स्वास्थ्य योजनाओं में पारदर्शिता की कमी और डिजिटल सुधार की मांग
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक क्लेरिकल गलती नहीं है, बल्कि एक संगठित रैकेट के तहत योजनाओं के फंड का दुरुपयोग किया गया है। इससे असली लाभार्थी योजनाओं से वंचित रह जाते हैं। विशेषज्ञों ने डिजिटल रिकॉर्ड सिस्टम और थर्ड पार्टी ऑडिट की मांग की है ताकि लाभार्थियों के सत्यापन में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। इस तरह की अनियमितताएं न केवल सार्वजनिक धन का दुरुपयोग करती हैं, बल्कि मातृ स्वास्थ्य योजनाओं की साख को भी कमजोर करती हैं।
सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही पर उठे सवाल
जांच फिलहाल जारी है और संबंधित अधिकारियों ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है। इस घोटाले ने जननी सुरक्षा योजना, महिला नसबंदी प्रोत्साहन योजना, और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

