कारोबार डेस्क: Indian rupee falls to record low against the US dollar: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में 14 पैसे की गिरावट आई है। इसी के साथ गुरुवार यानी 20 जून को रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पा आ गया है। दरअसल, रुपए में 0.20% की गिरावट आई है और यह इसकी कीमत प्रति डॉलर 83.64 पर है। रुपया इससे पहले 83.58 रुपए प्रति डॉलर के स्तर पर था। इससे पहले अप्रैल में डॉलर के मुकाबले अब तक की सबसे कमजोर स्थित पर था।

क्यों गिरा भारत का रुपया
रिपोर्ट्स के मुताबिक रुपये के गिरने का प्रमुख कारण डॉलर का मजबूत होना है। वहीं, भले ही रुपया अपने निचले स्तर पर हो लेकिन भारतीय मुद्रा अब भी दूसरी सबसे बेस्ट प्रदर्शन करने वाली करेंसी है। वही हॉन्ग-कॉन्ग इस लिस्ट में सबसे ऊपर है। हॉन्ग-कॉन्ग डॉलर अमेरिकी डॉलर को टक्कर दे रहा है। वहीं दूसरी ओर, चीनी करेंसी युआन में सुस्ती बनी हुई है।
बढ़ सकती है पेट्रोल और डीजल की कीमतें?
अमरीकी डॉलर के मुकाबले रुपए में बड़ी कमजोरी से सरकार के साथ आपकी मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं। इससे पैट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ती हैं जिसका सीधा असर आपके बजट पर होता है। भारत अपनी जरूरत का करीब 80 फीसदी पेट्रोलियम प्रोडक्ट आयात करता है। रुपए में गिरावट से पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का आयात महंगा हो जाएगा। तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल की घरेलू कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती हैं। डीजल के दाम बढ़ने से माल ढुलाई बढ़ जाएगी, जिसके चलते महंगाई में तेजी आ सकती है। वही इसके अलावा भारत बड़े पैमाने पर खाद्य तेलों और दालों का भी आयात करता है। रुपए के कमजोर होने से घरेलू बाजार में खाद्य तेलों और दालों की कीमतें बढ़ सकती हैं।
एक रुपये के फर्क से बढ़ जाता है 8 सौ करोड़ का बोझ
डॉलर के मूल्य में एक रुपए की बढ़ौतरी से तेल कंपनियों पर 8,000 करोड़ रुपए का बोझ बढ़ जाता है। इससे तेल कंपनियों को पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ता है। पेट्रोलियम उत्पाद की कीमतों में 10 फीसदी बढ़ोतरी से महंगाई करीब 0.8 फीसदी बढ़ जाती है। इसका सीधा असर आपने खाने-पीने और परिवहन लागत पर पड़ता है।

