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Karnataka CM : कर्नाटक के सीएम को हाई कोर्ट से मिली बड़ी राहत, अभी नहीं होगी गिरफ्तारी

by Rakesh Pandey
Karnataka Chief Minister Siddaramaiah
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बेंगलुरु : Karnataka Chief Minister Siddaramaiah : कर्नाटक के मुख्‍यमंत्री सिद्धारमैया को हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। जमीन से जुड़े भ्रष्टाचार के एक मामले में फ‍िलहाल उनकी ग‍िरफ्तारी नहीं होगी। वहीं कर्नाटक हाई कोर्ट ने एमपी-एमएलए कोर्ट को आदेश दिया है कि जब तक मामले की सुनवाई पूरी नहीं जो जाती, तब तक उनके खिलाफ़ कोई कार्रवाई न की जाए। तब तक मामले को सस्‍पेंड रखा जाए।

जस्‍ट‍िस एम. नागप्रसन्ना ने सिद्धारमैया की अपील पर यह अंतर‍िम आदेश पार‍ित क‍िया। इसके साथ ही सिद्धारमैया ने राज्‍यपाल के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनके ख‍िलाफ मामला चलाने की अनुमत‍ि दी गई थी। मामले की अगली सुनवाई 29 अगस्‍त को होगी।

हाई कोर्ट ने ये भी कहा है कि मामले की सुनवाई इस अदालत में हो रही है और दलीलें अभी पूरी नहीं हुई हैं, इसलिए अगली सुनवाई तक संबंधित अदालत अपनी कार्यवाही स्थगित रखेगी। तब तक कोई कार्रवाई नहीं होगी। वहीं 17 अगस्त को राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने तीन लोगों की श‍िकायत पर सिद्धारमैया के खिलाफ़ जांच करने की मंजूरी दे दी‍ थी।

Karnataka Chief Minister Siddaramaiah :  सिद्धारमैया ने लगाया आरोप

सिद्धारमैया ने आरोप लगाया है कि यह कार्रवाई राजनीतिक कारणों से की जा रही है ताकि उनकी चुनी हुई सरकार को अस्थिर किया जा सके। वहीं उन्होंने कहा कि वह कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। इस मामले में विपक्षी दलों ने भी सिद्धारमैया पर हमले किए हैं, और केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने उनके इस्तीफे की मांग की है।

वहीं अब इस मामले की अगली सुनवाई 29 अगस्त को होगी, जब उच्च न्यायालय सिद्धारमैया की याचिका पर विचार करेगा। इस बीच,सिद्धारमैया ने कहा है कि उन्हें अपने मंत्रिमंडल और पार्टी का पूरा समर्थन प्राप्त है।

Karnataka Chief Minister Siddaramaiah :  उच्च न्यायालय का फैसला

उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एन नागाप्रसन्ना ने कहा है कि स्पेशल अदालत को सभी कार्यवाही को तब तक स्थगित करना चाहिए, जब तक उच्च न्यायालय इस मामले पर सुनवाई नहीं कर लेता। सिद्धारमैया के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क देते हुए कहा कि गवर्नर ने बिना उचित कारण के अनुमति दी और राज्य कैबिनेट की सलाह को नजरअंदाज किया। उन्होंने ये भी कहा कि गवर्नर ने बिना विचार-विमर्श के कार्यवाही की जो कि संविधान के प्रावधानों के खिलाफ है।

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