पटना : सीएम नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा में हालात बेहद चिंताजनक हो गए हैं। एंबुलेंसकर्मियों ने वेतन भुगतान की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का फैसला किया है, जिसके चलते मरीजों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। हड़ताल का असर विशेष रूप से उन लोगों पर पड़ा है, जो स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत में हैं। इनमें प्रसव वाली महिलाएं और बुजुर्ग ज्यादा परेशान हैं।
हड़ताल का कारण
102 एंबुलेंस कर्मचारी संघ के सदस्यों ने अपने एंबुलेंस को सदर अस्पताल में खड़ा कर दिया है। यह कदम उस समय उठाया गया, जब नए कॉन्ट्रेक्टर द्वारा कर्मचारियों के समायोजन की मांग को लेकर किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई। एंबुलेंसकर्मियों का आरोप है कि उन्हें पिछले तीन महीनों से वेतन नहीं मिला है और उन्हें नए कॉन्ट्रेक्टर द्वारा बिना कारण हटाया जा रहा है।
त्योहारों का असर
इस हड़ताल का एक बड़ा कारण त्योहारों के दौरान वेतन का न मिलना है। एंबुलेंसकर्मियों ने बताया कि दशहरा, दीवाली और अब छठ जैसे महत्वपूर्ण पर्व बिना वेतन के गुजरे हैं। यह स्थिति उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ डाल रही है। उनके लिए बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है।
मरीजों की दुर्दशा
हड़ताल के कारण मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें या तो निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ रहा है या फिर भाड़े की गाड़ी करनी पड़ रही है। कई मरीजों की स्थिति इतनी गंभीर है कि उन्हें तत्काल एंबुलेंस की जरूरत है, लेकिन हड़ताल के कारण वे अस्पताल नहीं पहुंच पा रहे हैं।
प्रशासन का मौन
इस समस्या का समाधान करने के लिए एंबुलेंसकर्मियों ने पहले ही प्रशासन को चेतावनी दी थी। 29 अक्टूबर को उन्होंने सीएस का घेराव कर अपनी मांगों को तीन दिनों में पूरा करने का अल्टीमेटम दिया था, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे कर्मचारियों में आक्रोश बढ़ा।
यदि यह हड़ताल लंबे समय तक चलती है, तो न केवल मरीजों की स्थिति और खराब होगी, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं पर भी गंभीर प्रभाव पड़ेगा। एंबुलेंसकर्मियों ने यह भी कहा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे हड़ताल जारी रखेंगे।
नालंदा में एंबुलेंसकर्मियों की यह अनिश्चितकालीन हड़ताल न केवल उनके लिए, बल्कि मरीजों के लिए भी एक गंभीर समस्या बन चुकी है। प्रशासन को चाहिए कि वह जल्द से जल्द इस मुद्दे का समाधान करे, ताकि मरीजों को सही समय पर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें और एंबुलेंसकर्मी अपने अधिकारों को प्राप्त कर सकें। इस स्थिति को नजरअंदाज करना न केवल गलत है, बल्कि यह स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति एक बड़ा संकट भी पैदा कर सकता है।
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