गया/ पलामू : Palamu Arrest News: करीब 15 साल तक पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देता रहा एक हार्डकोर नक्सली आखिरकार कानून के शिकंजे में आ ही गया। बिहार-झारखंड सीमा पर नक्सल नेटवर्क को बड़ा झटका देते हुए गया पुलिस और सशस्त्र बलों की संयुक्त टीम ने कुख्यात नक्सली छोटू रविदास उर्फ शिवनंदन रविदास को झारखंड के पलामू से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी कई संगीन नक्सली मामलों में वांछित था। उसकी गिरफ्तारी को सुरक्षा एजेंसियां नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी उपलब्धि मान रही हैं।
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गया पुलिस की संयुक्त कार्रवाई
पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई गया पुलिस, डुमरिया थाना पुलिस और सशस्त्र बलों की एक विशेष टीम द्वारा की गई। नक्सली गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि छोटू रविदास अपने पैतृक गांव आया हुआ है। सूचना की पुष्टि के बाद त्वरित रणनीति बनाते हुए एक संयुक्त टीम को झारखंड रवाना किया गया।
लंबे समय से अपने गांव में ही छिपकर रह रहा था
जानकारी के मुताबिक, गिरफ्तार नक्सली झारखंड के पलामू जिले के छतरपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत बहुलानिया गांव का निवासी है। गया जिले में कई नक्सली वारदातों को अंजाम देने के बाद वह लंबे समय से अपने गांव में ही छिपकर रह रहा था। पुलिस को भनक लगते ही टीम ने गांव की घेराबंदी कर सटीक छापेमारी की।
भागने की कोशिश नाकाम, पुलिस ने नहीं दिया मौका
छापेमारी के दौरान जैसे ही पुलिस टीम बहुलानिया गांव पहुंची, छोटू रविदास ने भागने की कोशिश की। हालांकि, पुलिस की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई के कारण वह ज्यादा दूर नहीं जा सका और मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अभियान को पूरी तरह गोपनीय रखा गया था, ताकि नक्सली को फरार होने का मौका न मिल सके।
कई गंभीर मामलों में वांछित
छोटू रविदास उर्फ शिवनंदन रविदास के खिलाफ गया जिले के डुमरिया थाना में नक्सली गतिविधियों से जुड़े कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या, बम विस्फोट, हथियारों का इस्तेमाल और नक्सली संगठन के लिए काम करने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, वह बिहार और झारखंड सीमा क्षेत्र में सक्रिय नक्सली नेटवर्क का अहम हिस्सा रहा है और लंबे समय तक सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ था।
नक्सल विरोधी अभियान को मजबूती
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि छोटू रविदास की गिरफ्तारी से 15 वर्षों की लंबी फरारी का अंत हो गया है। इस दौरान उसे पकड़ने के लिए कई बार छापेमारी और अभियान चलाए गए, लेकिन वह हर बार बच निकलता था। अब उसकी गिरफ्तारी से न केवल पुराने मामलों की जांच को गति मिलेगी, बल्कि नक्सली नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने में भी मदद मिलेगी।

