Jamshedpur : मोहर्रम की मजलिसें संपन्न कराने के लिए धतकीडीह में हुई हुसैनी मिशन की मीटिंग के बाद इस मुद्दे को लेकर शिया समुदाय में उबाल आ गया है। कमेटी में शामिल कुछ पूर्व पदाधिकारियों ने नई कमेटी के चयन के तरीके पर जो सवाल उठाए हैं।
इसके बाद हुसैनी मिशन के अध्यक्ष सह राजद नेता मुनीर हसन ने एलान किया है कि अभी मजिलसों को संपन्न कराने के लिए कार्यकारी सचिव की तैनाती कर दी गई है। मुहर्रम के बाद विधिवत एलान कर सचिव के पद पर चुनाव कराया जाएगा।
14 दिन बाद शुरू होगा मुहर्रम
गौरतलब है कि मोहर्रम का महीना शुरू होने में अभी 15 दिन बाकी हैं। 15 दिन बाद मोहर्रम का चांद दिखने के बाद मजलिसों का दौर शुरू हो जाएगा। साकची में हुसैनी मिशन संस्था हर साल की तरह इस साल भी मजलिसों का आयोजन करेगी। यहां मजलिसों के बाद कुछ तारीखों में जुलूस भी निकाले जाते हैं। नौ मुहर्रम को हुसैनी मिशन के अध्यक्ष मुनीर हसन और सचिव सैयद रईस रिजवी छब्बन के नेतृत्व में मातमी जुलूस निकलता है जो साकची गोलचक्कर तक जाता है।
इस बार मजलिसों को कैसे संपन्न कराया जाएगा इसे लेकर धतकीडीह में अध्यक्ष मुनीर हसन की अध्यक्षता में एक मीटिंग संपन्न हुई। मीटिंग में तय हुआ कि इस मजलिसों को जाकिर नगर स्थित शिया जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना जकी हैदर खिताब फरमाएंगे। हुसैनी मिशन की नई कमेटी लेकर अब विवाद शुरू हो गया है।
इस कमेटी के सचिव रहे मोहम्मद राशिद ने इस साल अप्रैल में इस्तीफा दे दिया था। उनका कहना है कि पिछले साल अक्टूबर में हुई मीटिंग में पुरानी कमेटी को खत्म करने की बात हुई थी। इसके बाद नई कमेटी बनाई जानी थी। मगर, ऐसा नहीं हो सका। इसीलिए उन्होंने इस्तीफा दे दिया। हुसैनी मिशन की नई कमेटी को लेकर अब तरह तरह की चर्चा शुरू हो गई है।
अक्टूबर में भंग कर दी गई थी कमेटी
कहा जा रहा है कि इस कमेटी का बाकायदा चुनाव होना चाहिए था। दूसरी तरफ, हुसैनी मिशन के अध्यक्ष मुनीर हसन का कहना है कि पिछले साल अक्टूबर में हुसैनी मिशन की कमेटी भंग या खत्म होने की बात नहीं हुई थी। उनका कहना है कि नई कमेटी बनाने के लिए हुसैनी मिशन की तरफ से अधिसूचनाा जारी की गई थी। मगर, किसी ने किसी पद के लिए कोई आवेदन नहीं दिया। इस वजह से पुरानी कमेटी को ही कान्टीन्यू कर दिया गया है।
संस्था को समय सीमा के अंदर दिया गया था आवेदन
इस पर हुसैनी मिशन के नौहाखान जीशान का कहना है कि उन्होंने संस्था के अध्यक्ष को आवेदन दिया था। इसमें उन्होंने कहा था कि वह खुद संयुक्त या उप सचिव पद के लिए चुनाव में शामिल होना चाहते हैं। साथ ही उनके चाचा सैयद आजम हुसैनी मिशन के उपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ेंगे। जीशान का कहना है कि उनके इस आवेदन के बाद भी उन्हें नई कमेटी के बारे में कोई सूचना नहीं दी गई। जबकि, इस मुद्दे पर हुसैनी मिशन के अध्यक्ष मुनीर का कहना है कि चुनाव की जो समय-सीमा दी गई थी, उसके बाद जीशान का आवेदन आया था। इसलिए, उसे विचार के योग्य नहीं समझा गया।
मजलिसों के लिए इमामबारगाह की तलाश शुरू
हुसैनी मिशन की मजलिसें साकची में होती हैं। सरकार की तरफ से अब तक शिया समुदाय को कोई सामुदायिक भवन, मस्जिद या इमामबाड़ा के लिए जमीन नहीं दी गई है। जबकि, जमशेदपुर में सभी समुदाय के लिए उनका अपना सामुदायिक भवन और मस्जिदें हैं। कंपनी की तरफ से भी शहर में मस्जिदों के लिए खूब जमीनें दी गई हैं। शिया समुदाय के लिए अपना कोई सामुदायिक भवन या इमामबाड़ा नहीं होने की वजह से उन्हें हर साल क्वार्टर आवंटित कराना पड़ता है। यह क्वार्टर इतने खराब स्थिति में होते हैं कि यहां मजलिस करना मुश्किल होता है। बरसात में काफी दिक्कत होती है। महिलाओं के लिए क्वार्टर में जो जगह दी जाती है वह तो और भी बदतर होती है। इससे महिलाओं को हर साल परेशानी का सामना करना पड़ता है। शिया समुदाय की मांग है कि उन्हें भी अन्य समुदाय की तरह साकची में इमामबारगाह की जमीन दी जाए। ताकि वह अपने धार्मिक आयोजन संपन्न कर सकें।
वर्जन
हुसैनी मिशन के सचिव का मोहर्रम के बाद विधिवत चुनाव कराया जाएगा। अभी मोहर्रम को लेकर आपात व्यवस्था की गई है और कार्यवाहक सचिव बना लिया गया है।
मुनीर हसन, अध्यक्ष हुसैनी मिशन
हुसैनी मिशन की नई कमेटी और सचिव के पद पर चुनाव होना चाहिए। इस तरह, कमेटी बनाना ठीक नहीं है। जबकि, दो हमने और हमारे चाचा ने चुनाव में शामिल होने का आवेदन सही समय पर दिया गया था। मगर, उस पर कोई जवाब हमें नहीं दिया गया।
जीशान रिजवी, नौहाखान हुसैनी मिशन
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