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क्या है 80 करोड़ की संपत्ति के मालिक श्रीनाथ खंडेलवाल की कहानी, जिनकी मौत पर बेटा-बेटी तक नहीं आए

श्रीनाथ खंडेलवाल ने 400 से भी अधिक किताबें लिखीं थीं। जिस जमाने में आज की तरह इंटरनेट या ऑनलाइन जैसे प्लेटफॉर्म नहीं थे, तब भी इनकी किताबें बड़ी संख्या में बिका करतीं थीं और चर्चा के केंद्र में रहा करतीं थीं। आज भी उनकी किताबें बड़ी संख्या में बिक रहीं हैं। साहित्य जगत से उनका जुड़ाव बचपन में ही हो गया था।

by Anurag Ranjan
मशहूर साहित्यकार रहे श्रीनाथ खंडेलवाल का अंतिम संस्कार समाज के लोगों ने मिलकर किया
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सेंट्रल डेस्क : कभी अपनी लेखनी से साहित्य जगत में खासे चर्चित रहे वाराणसी के साहित्यकार श्रीनाथ खंडेलवाल की कहानी काफी मर्माहत करने वाली है। कभी 80 करोड़ की संपत्ति के मालिक रहे खंडेलवाल की संपत्ति पहले उनके बेटे-बेटी ने हथियाई, फिर उन्हें वृद्धाश्रम में रहने के लिए मजबूर किया। 30 दिसंबर को उनके निधन के बाद भी बेटा-बेटी अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुए। ऐसे में उनका अंतिम संस्कार समाज के कुछ लोगों को करना पड़ा। उनके निधन के बाद यह चर्चा एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है कि क्या पारिवारिक संस्कारों का अब हमारे समाज में कोई महत्व नहीं रह गया है।

लिखी थी 400 से अधिक किताबें

श्रीनाथ खंडेलवाल ने 400 से भी अधिक किताबें लिखीं थीं। जिस जमाने में आज की तरह इंटरनेट या ऑनलाइन जैसे प्लेटफॉर्म नहीं थे, तब भी इनकी किताबें बड़ी संख्या में बिका करतीं थीं और चर्चा के केंद्र में रहा करतीं थीं। आज भी उनकी किताबें बड़ी संख्या में बिक रहीं हैं। साहित्य जगत से उनका जुड़ाव बचपन में ही हो गया था। इन्होंने अपनी पहली किताब मात्र 15 वर्ष की आयु में ही लिख दी थी। ये पद्मपुराण, 2000 पन्नों का मत्स्य पुराण, तंत्र पर करीब 300 पन्नों की किताबें लिखने के लिए खासे मशहूर थे। इनकी कुछ किताबें तो अभी भी छप रही हैं। इन्होंने शिवपुराण का पांच खंडों में अनुवाद किया। असमिया और बांग्ला भाषा के अनुवादक के तौर पर भी इनकी एक विशेष पहचान थी। लगभग 21 उपपुराण और 16 महापुराणों का अनुवाद इन्होंने अपने लेखन काल में किया। कई किताबें उन्होंने वृद्धाश्रम में रहते हुए लिखीं। किताबों की बदौलत ये 80 करोड़ की संपत्ति के मालिक बने थे।

मशहूर साहित्यकार श्रीनाथ खंडेलवाल ने 400 से भी अधिक पुस्तकें लिखीं
मशहूर साहित्यकार श्रीनाथ खंडेलवाल ने 400 से भी अधिक पुस्तकें लिखीं

बेटे-बेटी ने हड़प ली संपत्ति

श्रीनाथ खंडेलवाल की कुल संपत्ति 80 करोड़ की थी, लेकिन, इनके बेटे और बेटी ने इनसे सारी जायदाद अपने नाम करा ली और इन्हें घर से बेदखल कर दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक बार इनके बीमार पड़ने पर इनके बेटे ने यहां तक कह दिया कि अगर ये मर जाएं तो बाहर किसी नाले में फेंक देना। इससे क्षुब्ध होकर ये घर से निकल गए और सारनाथ स्थित काशी कुष्‍ठ सेवा संघ वृद्धाश्रम चले गए। यहां इनकी मृत्यु 30 दिसंबर को हो गई। सामाजिक कार्यकर्ता अमन कबीर ने उनके निधन की सूचना उनके उनके बेटे और बेटी को दी। लेकिन, वे अंतिम संस्‍कार करने नहीं आए। ऐसे में अमन कबीर ने अपनी टीम के साथ कंधा देकर श्रीनाथ खंडेलवाल के शव को सराय मोहाना घाट पहुंचाया। जानकारी के अनुसार, जब इनके बेटे को फोन किया गया तो उन्होंने कहा कि वे अभी बनारस से बाहर हैं, वे नहीं आ सकते, कहकर अपनी असमर्थता जता दी। बेटी को भी कई बार कॉल किया गया ,लेकिन बेटी ने फोन ही नहीं उठाया।

बेटा-बेटी भी हैं जाने-माने नाम

श्रीनाथ खंडेलवाल के बेटे अनूप खंडेलवाल बनारस के जाने-माने बिजनेसमेन हैं। उनकी संपत्ति करोड़ों में है। वहीं बेटी और दामाद दोनों सुप्रीम कोर्ट में वकील हैं। वाराणसी की फिजाओं में यह चर्चा भी सरेआम है कि उनकी बेटी जब डॉक्टरेट कर रही थी तो वह खुद उसके थीसिस लिखते थे। एडवोकेट और डॉक्टर होते ही बिटिया 80 करोड़ की संपत्ति को अपना बनाने में लग गई और उसमें सफल भी रही। हालांकि, जीवन के अंतिम समय में उनके परिवार के किसी भी सदस्य का साथ नहीं देना और अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होना कई लोगों को झकझोर रहा है। लोग यह तक कर रहे हैं कि आज हम किस दौर में आ गए हैं कि समाज को अपनी लेखनी से प्रेरित करने वाले श्रीनाथ खंडेलवाल तक को अपने अंतिम समय में अपनों ने दुत्कार दिया और अंतिम संस्कार तक में शामिल होने से इन्कार कर दिया।

अधूरा रह गया नरसिंह पुराण का हिंदी अनुवाद

गौरतलब है कुछ महीने पहले श्रीनाथ खंडेलवाल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। इस वीडियो में उन्‍होंने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया था कि 80 करोड़ की जायदाद छीन कर बच्‍चों ने घर से निकाल दिया, जिससे उन्हें वृद्धाश्रम में रहना पड़ रहा है। आश्रम में रहने के दौरान वे नरसिंह पुराण की एक किताब का हिंदी अनुवाद कर रहे थे, जो पूरा नहीं हो सका।

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