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साल के अंत में क्यों होता है Year Ender, क्या ये सिर्फ Nostalgia से जुड़ा है…

डिजिटल एरा यानी साल 2000 के बाद, जो फिलहाल चल रहा है। साल 2000 से पहले दशक में आईएमडीबी, मेटाक्रिटिक जैसे वेबसाइट्स टॉप मूवीज, टीवी शोज़ और म्यूजिक के लिस्ट रिलीज करने लगे।

by Reeta Rai Sagar
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सेंट्रल डेस्क : साल का अंतिम दिन है, कोई पहाड़ों में स्नोफाॅल देखने जा रहा, तो कोई घर पर है, कोई न्यू एक्सरसाइज रिजीम बना रहा है, हर कोई इस सर्द मौसम का अपने हिसाब से मजा ले रहा है। इन सबके बीच इंटरनेट पर ईयर एंडर की बाढ़ आई हुई है, माने जो सालभर हुआ उसका एक रीकैप सा। मतलब पुराने जाते साल को एक बार याद कर अपनी यादों में संजो लेना।

इजिप्ट और बेबीलोन वालों ने कैेसे शुरूआत की

लेकिन ये ईयर एंडर क्यों शुरू हुआ और इसकी जरूरत क्यों पड़ी। आज जानते हैं, कहानी ईयर एंडर की। इसकी शुरूआत 3000 BC से शुरू हुई। तब इजिप्ट और बेबीलोन के लोग साल भर का बही-खाता रखते थे, जिसमें साल भर की बड़ी घटनाएं, एस्ट्रोनॉमिकल ऑब्जर्वेशन और शाही फरमानों का लेखा-जोखा रखा जाता था। रोमन और ग्रीक के इतिहास में भी कुछ ऐसा है। इसके बाद 1500-1900 के बीच भी यह जारी रहा और प्रिंट मीडिया में पंचांग और न्यूजपेपर में समरी प्रकाशित होने लगी।

1950-1980 के दशक में टीवी और रेडियो ने शुरू की थी ब्रॉडकास्टिंग

फिर आया टीवी का दौर- 1900-2000। साल 1929 में टाइम मैग्जीन ने ईयर इन रिव्यू की शुरूआत की। साल 1936 से बिलबोर्ड मैग्जीन ने ईयर एंड चार्ट जारी करना शुरू किया। इसमें टॉप गाने, आर्टिस्ट और एलबम की रैंकिंग बताई जाने लगी। इसके बाद 1950-1980 के दशक के बीच टेलीविजन और रेडियो स्टेशनों ने साल के अंत में स्पेशल ब्रॉडकास्टिंग शुरू की।

साल 2000 के बाद आया डिजिटल एरा और….

फिर आया डिजिटल एरा यानी साल 2000 के बाद, जो फिलहाल चल रहा है। साल 2000 से पहले दशक में आईएमडीबी, मेटाक्रिटिक जैसे वेबसाइट्स टॉप मूवीज, टीवी शोज़ और म्यूजिक के लिस्ट रिलीज करने लगे। 2010 के बाद सोशल मीडिया का क्रेज बढ़ा और फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर ने सालाना ईयर एंडर लिस्ट बनाना शुरू किया, जिसे हर कोई अपने तरीके से बनाता। जैसे सालभर के टॉप ट्रेंड्स, हैशटैग्स और मोमेंट्स का मिश्रण होता।

क्या मिलता है ईयर एंडर से

इस ईयर एंडर के पीछे भावुकता, यादों को संभालना, बीती बुरी बातों को भुलाना और क्लोजर जैसी भावना होती है। कई प्लेटफॉर्म जैसे यूट्यूब, स्पॉटिफाई और इंस्टाग्राम इन्हें पर्सनल और इंटरएक्टिव बना देते हैं, जिसे देखकर ट्रेंड्स और बड़े बदलावों को समझना आसान हो जाता है। जैसे कौन-सी टेक्नोलॉजी आई, कौन-सी आदतें बदलीं या कौन-से अचीवमेंट्स हुए।

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