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Jharkhand News : शुल्क देकर अवैध भवनों को वैध बनाने का अंतिम मौका, 60 दिन में आवेदन नहीं तो कार्रवाई का प्रावधान, 31 दिसंबर 2024 से पहले बने सभी अवैध भवनों पर लागू

Jharkhand News : झारखंड अवैध निर्मित भवन नियमितीकरण नियमावली, 2026 लागू, अधिसूचना जारी

by Nikhil Kumar
Illegal Buildings Regularization Last Chance
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Ranchi : राज्य सरकार ने शहरी क्षेत्रों में बिना अनुमति या नियमों के विरुद्ध बने भवनों को वैध करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। कैबिनेट के निर्णय के बाद झारखंड अवैध निर्मित भवन नियमितीकरण नियमावली, 2026 लागू कर दी गई है। नगर विकास विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि भवन मालिकों को 60 दिनों के भीतर आवेदन करना अनिवार्य होगा, अन्यथा ऐसे निर्माणों पर जुर्माना के साथ-साथ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई भी की जा सकती है। नई नियमावली के अनुसार यह प्रावधान 31 दिसंबर 2024 से पहले बने सभी अवैध भवनों पर लागू होगा। इसमें नगर निकायों, क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण, खनन क्षेत्र विकास प्राधिकरण तथा औद्योगिक टाउनशिप क्षेत्रों को शामिल किया गया है।

सरकार का उद्देश्य अनियोजित निर्माण को नियंत्रित करते हुए शहरी व्यवस्था को व्यवस्थित करना और राजस्व बढ़ाना है। सरकार का कहना है कि इस नियमावली से शहरी क्षेत्रों में अवैध निर्माण की समस्या पर नियंत्रण मिलेगा और विकास कार्यों को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया जा सकेगा। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि यह अवसर सीमित अवधि के लिए है और समय सीमा के बाद अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

बता दें कि सबसे अधिक अवैध भवनों को वैध करने का मामला रांची में है। इसके अलावा भी कई बड़े शहरों में बड़े पैमाने पर बिना भवन प्लान या विचलन कर मकान बनाए गए। 2019 में भी नियमितीकरण के लिए सरकार ने नियमावली बनाई थी, लेकिन शुल्क अधिक होने की वजह से व्यवस्था कारगर नहीं हो सकी थी।

ऑनलाइन आवेदन में देनी होगी ये जानकारी

नियमों के तहत भवन मालिकों को निर्धारित प्रारूप में ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन के साथ स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज, भवन का नक्शा, वर्तमान फोटो, शपथ पत्र तथा आवश्यक प्रमाण पत्र जमा करना अनिवार्य होगा।

कुल निर्मित क्षेत्र (बिल्ट-अप एरिया) का विवरण देना होगा। आवेदन के समय कुल निर्धारित शुल्क का 50 प्रतिशत जमा करना होगा और न्यूनतम राशि 10 हजार रुपये तय की गई है। सरकार ने इसके लिए नगर निकायों आदि को प्राधिकृत किया है।

पुराने निर्माणों को राहत

सरकार ने पुराने निर्माणों को राहत देते हुए कहा है कि जिन भवनों का निर्माण नगर निकाय या प्राधिकरण के गठन से पहले हुआ है, उनके लिए मात्र 5 हजार रुपये का एकमुश्त शुल्क लिया जाएगा, भले ही निर्धारित शुल्क अधिक क्यों न हो। वहीं आवासीय भवनों के लिए न्यूनतम 10 हजार और गैर-आवासीय भवनों के लिए 20 हजार रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। शेष राशि एकमुश्त या तीन बराबर किस्तों में जमा करने की सुविधा दी गई है।

इन स्थानों पर अवैध निर्माण नहीं होंगे नियमित

नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सभी प्रकार के अवैध निर्माण नियमित नहीं किए जाएंगे। सरकारी जमीन, सार्वजनिक उपक्रमों की भूमि, आवास बोर्ड, औद्योगिक क्षेत्र प्राधिकरण, स्थानीय निकायों या धार्मिक ट्रस्ट की जमीन पर किए गए अतिक्रमण को किसी भी स्थिति में वैध नहीं किया जाएगा।
इसके अलावा जिन जमीनों पर स्वामित्व स्पष्ट नहीं है, मास्टर प्लान या प्रस्तावित सड़क के दायरे में आने वाले भवन, जलाशय या जल संग्रहण क्षेत्र में बने निर्माण, पार्किंग और खुले स्थानों पर किए गए निर्माण, भूमि उपयोग के विपरीत निर्माण तथा विवादित या असुरक्षित घोषित भवन भी इस प्रक्रिया से बाहर रहेंगे।

सुरक्षा मानकों को लेकर सख्त रुख

सुरक्षा मानकों को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। आवश्यक श्रेणी के भवनों के लिए अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना होगा। साथ ही भवन की संरचनात्मक मजबूती का प्रमाण पत्र अधिकृत अभियंता से लेना अनिवार्य किया गया है। वर्षा जल संचयन की व्यवस्था भी करनी होगी। यदि यह व्यवस्था पहले से नहीं है तो नियमितीकरण की स्वीकृति मिलने के छह माह के भीतर इसे स्थापित करना होगा।

आवेदन के अधिकतम छह माह के भीतर निर्णय

नियमों के अनुसार आवेदन की जांच संबंधित प्राधिकरण द्वारा की जाएगी और अधिकतम छह माह के भीतर स्वीकृति या अस्वीकृति का निर्णय लिया जाएगा। यह भी स्पष्ट किया गया है कि केवल आवेदन कर देने या निर्णय में देरी होने से स्वतः स्वीकृति नहीं मानी जाएगी।

स्वीकृति मिलने के बाद संबंधित भवन को अधिभोग प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा, जिसके बाद उस पर चल रही कार्रवाई समाप्त कर दी जाएगी।

अपील का भी है प्रावधान

नई नियमावली में स्पष्ट है कि आवेदन के बाद यदि भवन में किसी प्रकार का नया निर्माण या बदलाव पाया गया तो आवेदन तुरंत रद्द कर दिया जाएगा और जमा की गई पूरी राशि जब्त कर ली जाएगी। इसके साथ ही कानून के तहत कार्रवाई करते हुए भवन को ध्वस्त भी किया जा सकता है।

नियमावली में अपील का प्रावधान भी रखा गया है। यदि कोई आवेदक निर्णय से असंतुष्ट है तो वह 30 दिनों के भीतर अपील कर सकता है, जिसका निपटारा तीन माह के भीतर किया जाएगा।

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