Ranchi : झारखंड सचिवालय सेवा संघ ने सचिवालय सेवा संवर्ग की समीक्षा के लिए गठित समिति को तत्काल भंग करने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र सौंपा है। संघ का आरोप है कि समिति के गठन की प्रक्रिया और उसके टर्म्स ऑफ रेफरेंस में गंभीर त्रुटियां हैं, जो न केवल सेवा हित बल्कि राज्य हित के भी प्रतिकूल हैं।
संघ के अध्यक्ष रितेश कुमार और महासचिव राजेश कुमार सिंह ने प्रेस क्लब में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि कार्मिक विभाग की गलत नीतियों का विरोध किया जाएगा। इसी कड़ी में कल मंगलवार को प्रोजेक्ट भवन में शांतिपूर्वक मानव शृंखला बनाकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इस संबंध में संघ ने मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा है।
संघ का कहना है कि कार्मिक विभाग का नजरिया पक्षपातपूर्ण और एकांगी प्रतीत होता है, जिससे कर्मचारियों के बीच व्यापक असंतोष व्याप्त है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि संवर्ग समीक्षा के लिए गठित समिति ने अपने आकलन का आधार भारत सरकार के कार्मिक विभाग के एक परामर्शात्मक पत्र को बनाया है, जबकि वह पूरी तरह बाध्यकारी नहीं है।
संघ ने यह भी स्पष्ट किया कि जिस चौथी कैडर समीक्षा समिति की अनुशंसा को आधार बनाया जा रहा है, वह केंद्र स्तर पर अभी लागू नहीं है। वर्तमान में केंद्रीय सचिवालय सेवा में तीसरी कैडर समीक्षा की अनुशंसाएं ही प्रभावी हैं। ऐसे में राज्य में नई व्यवस्था लागू करने का प्रयास तर्कसंगत नहीं माना जा सकता।
संघ का कहना है कि हाल ही में राज्य सरकार द्वारा सचिवालय कार्यालय प्रक्रिया नियमावली, 2025 लागू की जा चुकी है, जिसमें विभागों के पुनर्गठन और कार्यों का स्पष्ट निर्धारण पहले ही किया जा चुका है। ऐसे में पुनः इसी विषय पर समिति का गठन अनावश्यक और दोहरावपूर्ण है।
संघ ने पदोन्नति की समय-सीमा निर्धारण को भी नीतिगत विषय बताते हुए कहा कि यह सभी संवर्गों पर समान रूप से लागू होता है। किसी एक संवर्ग के लिए अलग से समीक्षा करना दुर्भावनापूर्ण कदम प्रतीत होता है।
संघ ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप करते हुए उक्त समिति को भंग करने तथा सेवा संवर्ग से जुड़े मुद्दों पर निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पुनर्विचार करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो संघ आंदोलन का रास्ता अपनाने पर विवश होगा।
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