Palamu : भीषण गर्मी के चलते पलामू जिले में पेयजल संकट लगातार विकराल रूप लेता जा रहा है। हालात की गंभीरता को देखते हुए झारखंड के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने सोमवार को पलामू परिसदन में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर स्थिति की समीक्षा की। बैठक में खराब पड़े चापाकलों की मरम्मत और जल आपूर्ति को लेकर त्वरित समाधान पर जोर दिया गया।
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि शॉर्ट टर्म योजनाओं पर तेजी से काम करते हुए आम लोगों को तुरंत राहत पहुंचाई जाए। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के इस दौर में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
2017 चपकालों का सड़ गया है राइजिंग पाइप
समीक्षा के दौरान बताया गया कि जिले में 1 अप्रैल तक कुल 27,037 चापाकल स्थापित हैं, जिनमें से करीब 4 हजार खराब हैं। इनमें 1370 चापाकल स्पेशल रिपेयर के अंतर्गत आते हैं, जबकि 2017 चापाकल राइजिंग पाइप सड़ने के कारण बंद पड़े हैं। विभाग ने यह भी जानकारी दी कि मरम्मत कार्य के लिए पर्याप्त फंड की कमी है।
इस पर मंत्री ने पिछले वर्ष दी गई एक करोड़ रुपये की अनाबद्ध राशि से तत्काल मरम्मत कराने का निर्देश दिया। साथ ही उपायुक्त को डीएफएमटी फंड से अतिरिक्त राशि उपलब्ध कराकर राइजिंग पाइप की खरीद और मरम्मत कार्य तेज करने को कहा गया।
पंचायत भवनों में लगेंगे फ्लेक्स बोर्ड
ग्रामीण क्षेत्रों में शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए पंचायत भवनों में फ्लेक्स बोर्ड लगाने का निर्णय लिया गया है। इन बोर्डों पर विभागीय अधिकारियों और मिस्त्रियों के मोबाइल नंबर दर्ज होंगे, ताकि लोग सीधे संपर्क कर खराब चापाकलों की सूचना दे सकें।
मरम्मत कार्य को गति देने के लिए 17 विशेष वाहनों को विभिन्न पंचायतों में तैनात किया जाएगा, जो मौके पर जाकर खराब चापाकलों को दुरुस्त करेंगे। इससे दूरदराज के इलाकों में भी तेजी से काम हो सकेगा।
जिले में लगाए जाएंगे 420 नए चापाकल
इस बीच पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने सभी विधायकों से अपने-अपने क्षेत्रों में नए चापाकल लगाने की अनुशंसा करने का आग्रह किया है। योजना के तहत पलामू के 21 प्रखंडों में कुल 420 नए चापाकल स्थापित किए जाएंगे, जिससे भविष्य में जल संकट को कम करने में मदद मिलेगी।
मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने कहा कि पलामू प्रमंडल से जुड़ा होने के कारण यहां की समस्या का समाधान उनकी नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि पिछले साल भी इसी तरह के प्रयासों से लोगों को राहत पहुंचाई गई थी।
60 फीट नीचे चला गया जलस्तर
उन्होंने चिंता जताई कि जिले का जलस्तर 55 से 60 फीट नीचे चला गया है, जो बेहद चिंताजनक है। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि आने वाले डेढ़ से दो महीने तक गर्मी और बढ़ेगी, ऐसे में पूरी गंभीरता के साथ काम कर पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त करना होगा।
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