RANCHI: झारखंड हाईकोर्ट में सोमवार को पुलिस मुखबिर के आरोप में हुए दोहरे हत्या के मामले में सजायाफ्ता नक्सली जेठा कच्छप और पूर्व विधायक पौलूस सुरीन की ओर से दायर आपराधिक अपील पर सुनवाई पूरी हो गई है। न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है।
दोनों दोषियों ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को चुनौती देते हुए उसे रद्द करने की मांग की है। सुरीन की ओर से वरीय अधिवक्ता बीएम त्रिपाठी और नवीन कुमार जायसवाल ने पक्ष रखा, जबकि जेठा कच्छप की ओर से अधिवक्ता मनोज चौबे ने दलील दीं। यह मामला वर्ष 2013 का खूंटी जिले के तोरपा का है, जहां भूषण कुमार सिंह और राम गोबिंद की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। दोनों को पुलिस मुखबिर होने के संदेह में निशाना बनाया गया था। निचली अदालत में अपर न्याययुक्त दिनेश कुमार ने इस मामले में जेठा कच्छप और पौलूस सुरीन को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी, साथ ही कच्छप पर 45 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। मामले में अभियोजन पक्ष ने 12 गवाह पेश किए थे, जबकि बचाव पक्ष की ओर से एक गवाह प्रस्तुत किया गया था।

