RANCHI: माध्यमिक आचार्य नियुक्ति विवाद से जुड़ी अर्चना कुमारी व अन्य अभ्यर्थियों की याचिका पर सोमवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की कोर्ट ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग का पक्ष सुनने के बाद मामले को इससे संबंधित जनहित याचिका PIL 2375/2024 के साथ टैग करते हुए खंडपीठ में सुनवाई के लिए भेजने का निर्देश दिया। इस दौरान जेएसएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल ने कोर्ट को बताया कि इसी मुद्दे से संबंधित तालेश्वर महतो की जनहित याचिका पर पहले से ही हाईकोर्ट की खंडपीठ में सुनवाई चल रही है और कोर्ट इसकी मॉनिटरिंग कर रही है। ऐसे में एक ही प्रकार के मामले की दो अलग-अलग कोर्ट में सुनवाई उचित नहीं होगी।
अर्चना कुमारी और अन्य अभ्यर्थियों ने अपनी रिट याचिका में आयोग से मॉडल आंसर शीट दिखाने का आग्रह किया है ताकि वे उस पर आपत्ति दर्ज करा सकें। वहीं संशोधन पिटीशन के जरिए 23 अप्रैल 2026 को जारी जेएसएससी के नोटिस को भी चुनौती दी गई है, जिसमें 2819 अभ्यर्थियों को 8 मई 2026 को प्रस्तावित पेपर-2 की पुनर्परीक्षा में शामिल होने का निर्देश दिया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि बिना दोषी अभ्यर्थियों और परीक्षा केंद्र के जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान किए सभी 2819 उम्मीदवारों को पुनर्परीक्षा के लिए बाध्य करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
हालांकि जेएसएससी ने कोर्ट को बताया कि 25 हजार से अधिक अभ्यर्थियों में से केवल 2819 के परीक्षा टर्मिनल में बाहरी हस्तक्षेप के साक्ष्य मिले हैं, जिसके आधार पर पुनर्परीक्षा का निर्णय लिया गया है। कोर्ट ने फिलहाल किसी भी प्रकार की अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है।
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