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DDU: एआई हमारे समय का बड़ा सच, इसे समझने की है जरूरत: कुलपति प्रो. पूनम टंडन

दर्शनशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. राजवंत राव ने कहा कि इतिहास पर नजर डालें तो पता चलता है कि जब-जब मनुष्य को अनियंत्रित शक्ति प्राप्त हुई है तब-तब उसे संभालना मुश्किल हुआ है।

by Anurag Ranjan
एआई
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गोरखपुर : दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग तथा महायोगी गुरु गोरखनाथ शोधपीठ के संयुक्त तत्वावधान में ‘दर्शन, संस्कृति एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता का अंतरसंबंध’ विषयक एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन ने कहा कि हमारा समय और समाज तेजी से बदल रहा है। इसमें टेक्नोलॉजी की बहुत बड़ी भूमिका है। टेक्नोलॉजी हमारे आचार विचार व्यवहार और कई मायनों में सभ्यता को भी प्रभावित कर रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) हमारे समय का एक बड़ा सच है। इससे इनकार नहीं किया जा सकता। जरूरत है तो इसे समझने की। मनुष्यता के हित में दिशा देने की। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सही दिशा में इस्तेमाल वरदान साबित हो सकता है।

एआई इंटेलिजेंस पर आधारित है हमारा भविष्य: डॉ. पैट्रिक

मुख्य अतिथि अमेरिका से पधारे न्यूयॉर्क सिटी प्रौद्योगिकी कॉलेज, न्यूयॉर्क सिटी विश्वविद्यालय के डॉ. पैट्रिक कॉर्बेट (निदेशक, व्यावसायिक एवं तकनीकी लेखन) ने कहा कि हमारा भविष्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित है। कुछ हद तक मौजूदा समय में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने अपनी जगह बना ली है। इसे रोका नहीं जा सकता। इससे साझेदारी करना ही समझदारी है। हर चीज के दो पहलू होते हैं। एक अच्छा है तो दूसरा बुरा। यह हमारे दृष्टिकोण पर निर्भर करता है कि हम उसके किस पक्ष को ज्यादा तवज्जो देते हैं। इस संदर्भ में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का विवेकपूर्ण इस्तेमाल करना होगा। विवेकपूर्ण इस्तेमाल ही भविष्य की समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करेंगी।

कुलपति प्रो. पूनम टंडन
संगोष्ठी में बोलतीं कुलपति प्रो. पूनम टंडन

दर्शनशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. राजवंत राव ने कहा कि इतिहास पर नजर डालें तो पता चलता है कि जब-जब मनुष्य को अनियंत्रित शक्ति प्राप्त हुई है तब-तब उसे संभालना मुश्किल हुआ है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर बात करते हुए हमें दो बिंदुओं पर निश्चित रूप से ध्यान देना होगा। पहला बिंदु यह है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास में स्टेट और कॉर्पोरेट दोनों रुचि ले रहे हैं। दूसरा महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि पूंजीवादी दौर में मुनाफा सबसे बड़ा सच है। ऐसी स्थिति में केवल विवेक की आशा में तकनीकी को छोड़ देना और शुभता की अपेक्षा करना बहुत व्यावहारिक नहीं लगता है। भविष्य का हश्र तो भविष्य ही बता सकता है।

विशिष्ट अतिथि अंतरराष्ट्रीय प्रकोष्ठ के डॉ. रामवंत गुप्ता ने जीव जगत, वनस्पति- जगत, औद्योगिक जगत, कृषि जगत आदि में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बेहतर उपयोग और तत्संबंधित भविष्य की संभावनाओं को रेखांकित किया।

संगोष्ठी के संयोजक डॉ. संजय कुमार राम ने विषय प्रवर्तन किया। सत्र के अंत में महायोगी गुरु श्री गोरक्षनाथ शोधपीठ के उप निदेशक डॉ. कुशल नाथ मिश्र ने अतिथियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

इनपुट: अनूप कुमार पटेल

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