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भारत ने कनाडाई रिपोर्ट को किया खारिज, ट्रूडो सरकार पर आंतरिक मामलों में ‘लगातार हस्तक्षेप’ का लगाया आरोप

पीआरसी (जनवादी गणराज्य चीन) की तरह, भारत कनाडा में राजनयिक अधिकारियों और प्रॉक्सी के माध्यम से विदेशी हस्तक्षेप करता है।

by Reeta Rai Sagar
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नई दिल्ली : भारत ने मंगलवार को कनाडाई आयोग की उस रिपोर्ट को नकार दिया, जिसमें भारतीय सरकार पर कनाडा के चुनावों में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया गया था। विदेश मंत्रालय ने कहा कि कनाडा ‘लगातार भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है’ और ऐसी स्थिति बनाने का प्रयास कर रहा है, जो अवैध माइग्रेशन और संगठित आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा दे रही है।

कनाडा कर रहा भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप

विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया कि ‘हमने कथित गतिविधियों के बारे में रिपोर्ट देखी है। वास्तव में, यह कनाडा है जो लगातार भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है। इसने अवैध माइग्रेशन और संगठित आपराधिक गतिविधियों के लिए माहौल तैयार किया है’। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस रिपोर्ट में भारत पर लगाए गए आरोपों को भारत नकारता हैं और उम्मीद करते हैं कि अवैध इमिग्रेशन को समर्थन देने वाले सिस्टम को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।

कनाडा के चुनाव में विदेशी हस्तक्षेपः कनाडाई मीडिया

इससे पहले कनाडा सरकार ने एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें कहा गया था कि चीन और भारत ने कनाडा के चुनावों में हस्तक्षेप करने की कोशिश की थी। रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि भारत को कनाडा के चुनावों में विदेशी हस्तक्षेप करने वाला दूसरा सबसे सक्रिय देश माना गया है। हालांकि, होग की प्रारंभिक रिपोर्ट में चीन को कनाडा के लिए ‘सबसे निरंतर और विदेशी हस्तक्षेप का खतरा बताया गया था’।

खुफिया जानकारी ताती है कि…..

दूसरी ओर, आयुक्त की अंतिम रिपोर्ट में यह बताया गया कि भारत ने ‘कनाडा में चुनावी विदेशी हस्तक्षेप में दूसरा सबसे सक्रिय देश’ बनने का तरीका अपनाया है, जैसा कि कनाडाई मीडिया में बताया जा रहा है।
होग ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि ‘पीआरसी (जनवादी गणराज्य चीन) की तरह, भारत कनाडा में राजनयिक अधिकारियों और प्रॉक्सी के माध्यम से विदेशी हस्तक्षेप करता है। खुफिया जानकारी यह संकेत देती है कि प्रॉक्सी एजेंटों ने विभिन्न कनाडाई राजनीतिज्ञों को अवैध वित्तीय समर्थन प्रदान किया और उन्हें प्रोत्साहित करने का काम किया, ताकि भारत समर्थक उम्मीदवारों को चुनाव में जितवाया जा सके या उन उम्मीदवारों पर प्रभाव डाला जा सके जो कनाडाई ऑफिस तक पहुंचने में सफल हो’।

कनाडाई मीडिया ने कहा कि ‘हालांकि खुफिया जानकारी यह नहीं दर्शाती कि जिन निर्वाचित अधिकारियों या उम्मीदवारों ने हस्तक्षेप के प्रयासों के बारे में जानकारी इकठ्ठा की थी, वे इस बारे में जानते थे’।

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