राजन्ना-सिरिसिल्ला (तेलंगाना): BRS (भारत राष्ट्र समिति) के कार्यकारी अध्यक्ष और सिरिसिल्ला विधायक केटी रामा राव ने बुधवार को सिरिसिल्ला टाउन स्थित तेलंगाना भवन में विशेष हनुमान पूजा का आयोजन किया और अन्न प्रसाद का वितरण किया। यह पहला मौका था, जब BRS नेता की ओर से इस तरह की धार्मिक भावना का सार्वजनिक प्रदर्शन किया गया, जिससे क्षेत्र में राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
बीआरएस बनाम बीजेपी : धार्मिक भावनाओं की राजनीति!
स्थानीय निकाय चुनावों से पहले आयोजित इस कार्यक्रम को लेकर बीजेपी ने बीआरएस पर तीखा हमला किया है। बीजेपी नेताओं का आरोप है कि बीआरएस हिंदू मतदाताओं के बीच बीजेपी के बढ़ते प्रभाव को कम करने के लिए धार्मिक भावनाओं का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है।
बीजेपी ज़िला अध्यक्ष रेड्डाबोइना गोपी ने आरोप लगाया कि, कुछ दिन पहले तक केटीआर ‘जय श्री राम’ के नारों और अयोध्या अक्षिंतलु मुद्दे की आलोचना कर रहे थे। अब जब विधानसभा चुनावों के बाद समर्थन में गिरावट आई है, तो वह हिंदू मतदाताओं को साधने की नई रणनीति अपना रहे हैं।
भव्य आयोजन : तेलंगाना भवन में हुई धार्मिक सजावट
हनुमान पूजा के लिए तेलंगाना भवन को केले और आम के पत्तों से सजाया गया था। सैकड़ों श्रद्धालु पूजा में शामिल हुए और अन्न प्रसाद प्राप्त किए। रामा राव स्वयं जमीन पर बैठकर भक्तों के साथ प्रसाद ग्रहण करते नजर आए।
मीडिया को नहीं मिली अनुमति
इस आयोजन में मीडिया की प्रत्यक्ष उपस्थिति पर रोक रही। केवल पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा साझा किए गए वीडियो और तस्वीरों को ही सार्वजनिक किया गया, जिससे पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
कांग्रेस का हमला : राजनीतिक श्रद्धा या निजी भक्ति!
कांग्रेस के सिरिसिल्ला प्रभारी केके महेंद्र रेड्डी ने कहा कि किसी की निजी श्रद्धा में कोई आपत्ति नहीं हो सकती, लेकिन उन्होंने केटीआर पर जनता के मुद्दों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, आज अचानक ‘जय श्री राम’ और ‘जय हनुमान’ जैसे नारे गूंजने लगे हैं, जो राजनीति से प्रेरित लगते हैं। इसके साथ ही, कलेश्वरम परियोजना के पैकेज 9 और 10 जैसे कई प्रमुख कार्य बीआरएस शासनकाल में अधूरे रह गए।
वेंकटेश्वर स्वामी ब्रह्मोत्सव में भी की भागीदारी
हनुमान पूजा के बाद, केटी रामा राव ने वेमुलावाड़ा विधानसभा क्षेत्र के मलाकपेटा में आयोजित श्री वेंकटेश्वर स्वामी ब्रह्मोत्सव में भी हिस्सा लिया, जिससे उनके हालिया धार्मिक रुख को और बल मिला।

