जमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को दूर करने और छात्र-छात्राओं के पठन-पाठन को सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। यह निर्णय 16 जुलाई 2025 को आयोजित जिला विकास समन्वय एवं अनुश्रवण समिति (दिशा) की बैठक के बाद लिया गया, जिसकी अध्यक्षता सांसद बिद्युत बरण महतो ने की थी। बैठक में बहरागोड़ा के विधायक समीर महंती ने ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाया था। उन्होंने शिकायत की थी कि +2 विद्यालयों के शिक्षक निचली कक्षाओं में पढ़ाने से परहेज कर रहे हैं, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इस पर समिति ने निर्देश दिया कि +2 विद्यालयों के शिक्षक भी आवश्यकतानुसार निचली कक्षाओं में पढ़ाएं।
जारी निर्देश के अनुसार, जिन विद्यालयों में माध्यमिक या प्रारंभिक कक्षाएं संचालित हो रही हैं और वहां शिक्षकों की कमी है, वहां स्नातकोत्तर प्रशिक्षित शिक्षक भी निचली कक्षाओं में अध्यापन कार्य करेंगे। इसके अलावा, जिन विद्यालयों का उत्क्रमण मध्य से उच्च विद्यालय या उच्च से +2 विद्यालय में हुआ है, लेकिन शिक्षकों के पद स्वीकृत नहीं हैं, वहां उपलब्ध शिक्षक ही सभी कक्षाओं का संचालन करेंगे।
आदेश नहीं मानने पर होगी कार्रवाई
शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि सभी शिक्षक निर्धारित निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन करें। यदि कोई शिक्षक आदेश का अनुपालन नहीं करता है, तो संबंधित विद्यालय के प्रधानाध्यापक या प्रभारी प्रधानाध्यापक को ऐसे शिक्षकों की सूची तुरंत विभाग को उपलब्ध करानी होगी। विभाग ने चेतावनी दी है कि आदेश की अवहेलना करने वाले शिक्षकों के खिलाफ झारखंड सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2016 के तहत कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
बच्चों को सड़क सुरक्षा के प्रति किया जाएगा जागरूक
पूर्वी सिंहभूम जिले में सड़क सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर प्रशासन ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। जिला परिवहन पदाधिकारी के पत्र और 19 मार्च 2026 को आयोजित जिला सड़क सुरक्षा एवं यातायात समिति की बैठक के निर्देशों के आधार पर सभी स्कूलों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। जारी आदेश के अनुसार, स्कूल बसों और बच्चों को लाने-ले जाने वाले वाहनों में सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य होगा। बसों की खिड़कियों में जाली लगाना और निर्धारित सीटों के अनुसार ही बच्चों को बैठाना सुनिश्चित किया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी संबंधित विद्यालय के प्रधानाध्यापक और प्रबंधन समिति की होगी।
इसके अलावा, प्रत्येक शनिवार को स्कूलों में सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। इनमें परिचर्चा, सेमिनार, नुक्कड़ नाटक, पेंटिंग, क्विज, भाषण और वाद-विवाद जैसी गतिविधियां शामिल होंगी, ताकि छात्रों और अभिभावकों को जागरूक किया जा सके। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि 18 वर्ष से कम आयु के छात्र किसी भी प्रकार के गियरयुक्त वाहन का संचालन नहीं करेंगे। इस नियम का सख्ती से पालन कराया जाएगा।

