Home » Chaibasa Success Story :बायोफ्लॉक तकनीक से बदली संजय गागराई की तकदीर, मछली पालन कर सालाना कमा रहे 2 लाख से अधिक

Chaibasa Success Story :बायोफ्लॉक तकनीक से बदली संजय गागराई की तकदीर, मछली पालन कर सालाना कमा रहे 2 लाख से अधिक

by Rajeshwar Pandey
chaibasa News
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

चाईबासा : झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिला अंतर्गत हाटगम्हरिया प्रखंड के कुसमुण्डा गांव निवासी संजय गागराई ने आधुनिक तकनीक आधारित मत्स्य पालन से आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और जिला मत्स्य कार्यालय के तकनीकी सहयोग से उन्होंने बायोफ्लॉक तकनीक अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर ली है।

पहले मजदूरी, अब मत्स्य उद्यमी

संजय गागराई पहले एक साधारण ग्रामीण परिवार से थे। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उनका परिवार मजदूरी, छोटी खेती और बागवानी पर निर्भर था। सीमित आय में घर चलाना मुश्किल था। बेहतर आजीविका के लिए उन्होंने मत्स्य पालन को चुना और मत्स्य विभाग से संपर्क किया।

6.37 लाख की मिली सहायता

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत उन्हें आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता दी गई। योजना में 7 टैंक आधारित बायोफ्लॉक इकाई की स्वीकृति मिली। 7.50 लाख की कुल परियोजना लागत में से लगभग 6.37 लाख रुपये अनुदान के रूप में दिए गए। इस सहयोग से संजय ने आधुनिक मत्स्य इकाई स्थापित की।

सालाना 5 से 6 टन मछली उत्पादन

प्रशिक्षण के बाद संजय ने पंगास और तिलापिया प्रजाति की मछलियों का उत्पादन शुरू किया। वर्तमान में वे प्रतिवर्ष 5 से 6 टन मछली का उत्पादन कर रहे हैं। इससे उन्हें सालाना 2 लाख रुपये से अधिक की शुद्ध आय हो रही है। उत्पादित मछलियों की बिक्री स्थानीय बाजारों में की जा रही है। बायोफ्लॉक तकनीक में कम पानी और सीमित जगह में अधिक उत्पादन होता है। लागत कम और मुनाफा ज्यादा है।

योजनाओं से मिल रहा रोजगार : डीसी

जिला के उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाना और लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है। संजय गागराई की सफलता बताती है कि योजनाओं का सही उपयोग कर युवा अपनी स्थिति मजबूत कर सकते हैं। सरकारी मदद, तकनीकी प्रशिक्षण और मेहनत से ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक सशक्तीकरण संभव है।

युवाओं को मिल रहा लाभ : नवीन

जिला मत्स्य पदाधिकारी नवीन कुमार ने बताया कि विभाग लाभुकों को तकनीकी प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और मार्गदर्शन दे रहा है। आधुनिक तकनीक से उत्पादन बढ़ रहा है और रोजगार के नए अवसर बन रहे हैं। उन्होंने युवाओं से विभागीय योजनाओं का लाभ लेने की अपील की।

अब हूं आत्मनिर्भर : संजय

लाभुक संजय गागराई ने कहा कि मत्स्य विभाग और पीएमएमएसवाई से जीवन बदल गया है। पहले परिवार की हालत कमजोर थी, लेकिन आज मैं आत्मनिर्भर हूं और नियमित आय कमा रहा हूं। उन्होंने अन्य युवाओं से भी आधुनिक मत्स्य पालन अपनाकर स्वरोजगार की दिशा में बढ़ने की अपील की।

Read Also- Chaibasa News : मंझारी में हैवान बाप ने 6 साल की बेटी को पीट-पीटकर मार डाला, ग्रामीणों ने पेड़ से बांधा

Related Articles

Leave a Comment